चित्रकूट में नवरात्र और दशहरा के दौरान श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए भारी वाहनों की आवाजाही पर लगी पाबंदी का समय बढ़ाने की मांग उठी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सप्तमी से लेकर दशहरा तक शहर में भारी वाहनों को रात 10 बजे के बजाय 12 बजे के बाद प्रवेश दिया जाना चाहिए। इससे त्योहार के दौरान सड़कों पर चलने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।
नवरात्र के दिनों में मंदिरों में दर्शन करने वालों के साथ दुर्गा पूजा पंडालों में जाने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ जाती है। शाम और रात के समय सड़कों पर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की आवाजाही अधिक रहती है। ऐसे में भारी वाहनों की आवाजाही से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
सप्तमी से दशहरा तक बदलने की मांग
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से अपील की है कि नवरात्र की सप्तमी, अष्टमी, नवमी और दशहरा के दिन यातायात व्यवस्था में जरूरी बदलाव किए जाएं। उनकी मांग है कि इन विशेष दिनों में भारी वाहनों के शहर में प्रवेश पर लगी नो-एंट्री रात 10 बजे के बजाय रात 12 बजे के बाद खोली जाए।
लोगों का मानना है कि इस समय में बदलाव होने से त्योहार के दौरान श्रद्धालुओं को सुरक्षित आवागमन का अवसर मिलेगा। साथ ही, मंदिरों और पूजा पंडालों के आसपास भीड़ के बीच भारी वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित किया जा सकेगा।
नो-एंट्री खुलने के बाद बढ़ सकती है परेशानी
मौजूदा व्यवस्था के तहत नो-एंट्री समाप्त होने के बाद भारी वाहनों का आवागमन शुरू हो जाता है। स्थानीय लोगों को आशंका है कि त्योहार के दिनों में रात 10 बजे के बाद भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु सड़कों पर मौजूद रहते हैं। ऐसे में भारी वाहनों की आवाजाही शुरू होने से जाम और सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ सकता है।
इस समस्या को देखते हुए लोगों ने यातायात पुलिस से भीड़भाड़ वाले मार्गों पर विशेष निगरानी रखने और जरूरत के अनुसार वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने की मांग की है।
वैकल्पिक यातायात व्यवस्था लागू करने पर जोर
शहरवासियों का कहना है कि केवल नो-एंट्री का समय बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होगा। त्योहार के दौरान प्रमुख मंदिरों, दुर्गा पंडालों और अधिक भीड़ वाले रास्तों पर यातायात प्रबंधन की विशेष व्यवस्था भी जरूरी है।
प्रशासन जरूरत के अनुसार भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित कर सकता है। इसके अलावा, संवेदनशील स्थानों पर यातायात कर्मियों की तैनाती और भीड़ को नियंत्रित करने के उपाय भी किए जा सकते हैं।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील
नवरात्र और दशहरा के दौरान चित्रकूट में धार्मिक गतिविधियां बढ़ने के कारण यातायात व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि श्रद्धालुओं की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए नो-एंट्री के समय की समीक्षा की जाए।
हालांकि, भारी वाहनों की नो-एंट्री का समय बढ़ाने को लेकर प्रशासन की ओर से अंतिम निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है। अब यह देखना होगा कि त्योहार के दौरान सुरक्षित यातायात सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन क्या कदम उठाता है।
डिस्क्लेमर: नो-एंट्री के समय में बदलाव स्थानीय लोगों की मांग है। इसे प्रशासन का घोषित निर्णय न समझें।

