
गंगाराम विश्वकर्मा@नवभारत
मुंबई/वाराणसी: गंगातीरी गाय (Gangatiri Cow) उत्तर प्रदेश (UP) और बिहार की शान है। गाय की इस नस्ल की उत्पत्ति गंगा के किनारे वाले प्रदेशों की मानी जाती है। उत्तर प्रदेश के बलिया,गाजीपुर व बिहार के रोहतास और शाहबाद जिले इसके उद्गम स्थल हैं। गंगातीरी गाय को अच्छी दूध देने वाली मानी जाती हैं। गंगातीरी गाय आमतौर पर प्रतिदिन 8-16 लीटर तक दूध देती हैं। इसके दूध में फैट लगभग 4.9 प्रतिशत होता है। जो 4.1 से 5.2 प्रतिशत तक भी हो सकता है। गंगातीरी गाय की नस्ल लुप्त होने की कगार पर है। वाराणसी के गौशालाओं में इनका संरक्षण किया जा रहा है। गंगातीरी गाय के संरक्षण व संवर्धन के लिए अडानी फाउंडेशन ने सेवापुरी ब्लॉक के खादी ग्रामोद्योग परिसर में गाय के गोबर (Cow Dung) से पेंट (Paint),अगरबत्ती (Incense Stick) और धूप बनाने का उपक्रम शुरू किया है।
गोबर से बनती है धूपबत्ती
इससे जहां गंगातीरी गायों का संरक्षण हो रहा है वहीं महिलाओं को रोजगार के नए अवसर भी मिल रहे हैं। सेवापुरी से करीब 14 किमी की दूरी पर रामेश्वर में गंगातीरी गाय को संरक्षण के लिए गौशाला का निर्माण किया गया है। अडानी फाउंडेशन इस गौशाला से गोबर मंगाती है जिसे डीवाटरिंग करने के बाद सुखाया जाता है। गोबर को सूखने के बाद इसे मशीनों में पीस कर पाउडर बनाया जाता है फिर लेई बनाकर इसे मशीनों से अगरबत्ती, धूप बनाया जाता है।
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अडानी फाउंडेशन की कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी हेड ऊषा मिश्रा ने बताया कि इस केंद्र की शुरुआत 2022 में हुई थी। गाय के गोबर से बनने वाली अगरबत्ती व धूप में 52 प्रकार की जड़ी बूटी मिलाई जाती है। इस केंद्र में गंगातीरी प्रीमियम अगरबत्ती, धूप और नारी शक्ति के नाम से अगरबत्ती बनाई जाती है। ऊषा मिश्रा ने बताया कि धूप और अगरबत्ती में मिलाई जाने वाली जड़ी बूटी हवन सामग्री होती है जो घर के वातावरण को शुद्ध बनाती है और इससे सांस लेने में कोई नुकसान नहीं होती है। यहां से बने उत्पादों को अहमदाबाद स्थित अडानी कॉरपोरेट हाउस में भेजा जाता है। उन्होंने कहा कि हम इन उत्पादों को बाजार में भी उतारने की तैयारी कर रहे हैं।
केंद्र के सेंटर इंचार्ज व ट्रेनर अनुज श्रीवास्तव ने बताया कि अगरबत्ती व धूप बनाने में अभी प्रतिदिन करीब 30 किलोग्राम गोबर की जरूरत पड़ रही है, लेकिन कुछ समय में 20 गुना उत्पादन बढ़ जायेगा। इस केंद्र में महिलाओं को अगरबत्ती बनाने का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। सेवापुरी के खादी ग्रामोद्योग विद्यालय प्रांगण में गोबर से प्राकृतिक पेंट वाले प्लांट की भी शुरुआत हो गई है। काशी प्रेरणा पेंट के नाम से बनने वाले इस पेंट के निर्माण में 20 प्रतिशत गोबर और 80 प्रतिशत केमिकल का उपयोग होता है। इससे पशुपालकों को गोबर बेचने का विकल्प भी मिलेगा।
Source Agency News






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