संसद के बजट सत्र के दौरान नागरिकों की आय और आर्थिक असमानता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इसी क्रम में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राज्यसभा सांसद समीरुल इस्लाम ने केंद्र सरकार से भारत में आय वितरण को लेकर अहम सवाल किया।
समीरुल इस्लाम ने पूछा कि क्या यह सही है कि देश की शीर्ष 1 प्रतिशत आबादी की औसत आय निचले 50 प्रतिशत लोगों की तुलना में करीब 150 गुना अधिक है। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या शीर्ष 10 प्रतिशत आबादी के पास कुल आय का लगभग 57.75 प्रतिशत हिस्सा है, जबकि निचले 50 प्रतिशत लोगों को केवल 15 प्रतिशत आय ही मिलती है।
इस सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि देश में आय का वर्गवार आधिकारिक डेटा केंद्रीय स्तर पर संकलित नहीं किया जाता। हालांकि, उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा एकत्र घरेलू उपभोग व्यय के आंकड़ों को आर्थिक असमानता का संकेतक माना जा सकता है।
मंत्री के अनुसार, हालिया घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (2023-24) से यह सामने आया है कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आय असमानता में कमी दर्ज की गई है। ग्रामीण इलाकों में गिनी गुणांक 2022-23 के 0.266 से घटकर 0.237 हो गया है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 0.314 से घटकर 0.284 दर्ज किया गया।
उन्होंने आगे बताया कि यह रुझान अंतरराष्ट्रीय आकलनों से भी मेल खाता है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक भारत का गिनी सूचकांक 2011-12 के मुकाबले कम हुआ है, जिससे यह संकेत मिलता है कि आय समानता की दिशा में देश की स्थिति में सुधार हुआ है।







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