संसद में बेरोजगारी का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया। लोकसभा में एक सांसद ने देश में बेरोजगारों की संख्या, बेरोजगारी दर और इसे कम करने के लिए सरकार की रणनीति को लेकर विस्तृत सवाल उठाया। उन्होंने राज्य-वार, आयु-वार आंकड़ों के साथ-साथ कौशल विकास, रोजगार सृजन और दीर्घकालिक योजनाओं की जानकारी भी मांगी।
सांसद ने यह भी जानना चाहा कि बेरोजगारी बढ़ने के पीछे कौशल अंतर की क्या भूमिका है और सरकार इसे दूर करने के लिए क्या कर रही है। इसके अलावा छोटे और मध्यम उद्यमों को बढ़ावा देकर रोजगार बढ़ाने, बेरोजगारी के आर्थिक प्रभाव के आकलन और स्थायी रोजगार सुनिश्चित करने की दीर्घकालिक रणनीति पर भी सवाल पूछे गए।
सरकार ने क्या जानकारी दी
सरकार की ओर से बताया गया कि रोजगार और बेरोजगारी से जुड़े आधिकारिक आंकड़े नियमित रूप से एक राष्ट्रीय सर्वे के जरिए एकत्र किए जाते हैं। उपलब्ध ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग में बेरोजगारी दर में पिछले कुछ वर्षों में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। यह दर 2017-18 के मुकाबले 2023-24 में काफी कम हुई है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य और आयु-वार विस्तृत आंकड़े सार्वजनिक रिपोर्टों में उपलब्ध हैं। रोजगार सृजन और युवाओं की कार्यक्षमता बढ़ाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है, जिसके लिए कई योजनाएं और कार्यक्रम लागू किए जा रहे हैं।
कौशल विकास और प्रशिक्षण पर जोर
सरकार ने बताया कि युवाओं को उद्योग-अनुकूल और भविष्य के लिए तैयार बनाने के उद्देश्य से कौशल विकास मिशन के तहत कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन योजनाओं के माध्यम से युवाओं को कौशल, पुनः-कौशल और उन्नत प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, ताकि वे रोजगार के नए अवसरों के लिए सक्षम बन सकें।
MSME सेक्टर से रोजगार बढ़ाने की कोशिश
सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र को रोजगार सृजन की रीढ़ बताते हुए कहा कि इस सेक्टर के समर्थन के लिए कई योजनाएं लागू की गई हैं। इनमें उद्यमिता को बढ़ावा देने, आसान ऋण उपलब्ध कराने, क्लस्टर विकास, विपणन सहायता और तकनीकी उन्नयन जैसी पहलें शामिल हैं।
इसके साथ ही MSMEs को औपचारिक व्यवस्था से जोड़ने, डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए रोजगार तलाशने वालों और नियोक्ताओं को जोड़ने तथा अनौपचारिक उद्यमों को वित्तीय लाभ दिलाने के लिए भी कदम उठाए गए हैं।
नई रोजगार प्रोत्साहन योजना
सरकार ने जानकारी दी कि रोजगार-लिंक्ड इंसेंटिव योजना के तहत विशेष रूप से विनिर्माण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर नौकरियां पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना के जरिए अगले कुछ वर्षों में करोड़ों नए रोजगार अवसर सृजित करने की योजना है।
इसके अलावा एक राष्ट्रीय डिजिटल पोर्टल के माध्यम से नौकरी खोज, जॉब फेयर, करियर काउंसलिंग, प्रशिक्षण और कौशल विकास से जुड़ी जानकारियां भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।








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