उत्तर प्रदेश में ठंडी पछुआ हवाओं ने गलन बढ़ा दी है। सुबह और शाम के समय ठंड का असर ज्यादा महसूस किया जा रहा है। मौसम को देखते हुए प्रदेश के करीब 22 जिलों में घने कोहरे को लेकर चेतावनी जारी की गई है, जबकि कई अन्य इलाकों में हल्का से मध्यम कोहरा छाने की संभावना जताई गई है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार एक फरवरी से प्रदेश में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है। इसके असर से एक से तीन फरवरी के बीच पश्चिमी और पूर्वी यूपी के कई हिस्सों में बारिश होने के आसार हैं। कुछ क्षेत्रों में तेज हवा के साथ मौसम और बिगड़ सकता है।
अनुमान है कि अगले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के न्यूनतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। तराई और पूर्वी इलाकों में कोहरे का असर ज्यादा देखने को मिल सकता है। वर्तमान में बुलंदशहर प्रदेश का सबसे ठंडा जिला रिकॉर्ड किया गया है।
जनवरी महीने में बारिश सामान्य से काफी कम रही। आंकड़ों के मुताबिक इस माह में अपेक्षित वर्षा की तुलना में लगभग 39 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई, जिससे ठंड के बावजूद मौसम शुष्क बना रहा।
इन जिलों में घने कोहरे का असर
कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, संभल और बदायूं।
आने वाले 3 दिनों में मौसम का असर
बारिश, तेज हवा और ओलावृष्टि की आशंका से किसानों की चिंता बढ़ गई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार तेज हवाओं से गेहूं की फसल गिरने पर दाने हल्के रह सकते हैं, जिससे उत्पादन में 20 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। गन्ने की फसल भी कई इलाकों में गिर चुकी है, जिससे गुणवत्ता और पैदावार प्रभावित होने की संभावना है।
सरसों और सब्जियों की फसल को भी मौसम से नुकसान पहुंचा है। खेतों में जलभराव के कारण सरसों की फलियां जमीन पर गिरने का खतरा बढ़ गया है, जबकि सब्जियों की फसलों में सड़न और गलन की समस्या सामने आ रही है। खासतौर पर सब्जी उत्पादक किसानों के लिए यह मौसम सबसे ज्यादा नुकसानदेह साबित हो सकता है।








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