कानपुर में फर्जी डिग्री और मार्कशीट मामले की जड़ें उजागर करने के लिए SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) सक्रिय हो गई है। सोमवार को SIT की टीमें छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, अलीगढ़, हापुड़, मेरठ और नोएडा की यूनिवर्सिटी जांच करने रवाना हुईं।
CSJMU में जांच
एसीपी अनवरगंज अभिषेक राहुल के नेतृत्व में CSJMU पहुंची टीम ने प्रशासनिक भवन में करीब एक घंटे तक दस्तावेजों और प्रपत्रों की जांच की।
जांच के मुख्य बिंदु
SIT की जांच तीन मुख्य पहलुओं पर केंद्रित होगी:
आरोपियों के पास पाए गए मार्कशीट, डिग्री, माइग्रेशन सर्टिफिकेट, और विश्वविद्यालय की सील/मोहऱ तक कैसे पहुंचे, और कहीं विश्वविद्यालय सिस्टम में कोई लीक तो नहीं हुई। इसके लिए विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारियों से भी बातचीत की जाएगी।
आरोपियों द्वारा बांटी गई डिग्रियां विश्वविद्यालय के दस्तावेजों में रजिस्टर्ड हैं या नहीं।
गिरोह ने ऑनलाइन डिग्री अपलोड कैसे की, इसका विवरण।
जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि विश्वविद्यालयों में खाली सीटें भरने के लिए प्रबंधन ने कोचिंग संचालकों के साथ किस हद तक सांठ-गांठ की।
आरोपी और गिरफ्तारी
18 फरवरी को किदवई नगर पुलिस ने जूही गौशाला स्थित शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन कार्यालय में छापा मारकर शैलेंद्र कुमार (रायबरेली/साकेत नगर), नागेंद्र मणि त्रिपाठी (कौशांबी), जोगेंद्र (गाजियाबाद) और अश्वनी कुमार (शुक्लागंज) को गिरफ्तार किया था।
शैलेंद्र, जो मैथ से MSC कर चुका है, गिरोह का सरगना है।
पुलिस अब गिरोह के अन्य पांच सदस्यों की तलाश में है: मयंक भारद्वाज (छतरपुर), मनीष उर्फ रवि (हैदराबाद), विनीत (गाजियाबाद), शेखू (भोपाल), शुभम दुबे (कानपुर)।
बरामद सामग्री
आरोपियों के पास से 900 से अधिक मार्कशीट, डिग्री और माइग्रेशन सर्टिफिकेट बरामद किए गए थे।
रिमांड की तैयारी
डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ के लिए उन्हें रिमांड में लेने की तैयारी की जा रही है, और 26 फरवरी तक कोर्ट में रिमांड अर्जी दाखिल की जा सकती है।
SIT के गठन के पीछे पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल का उद्देश्य पूरे नेटवर्क की जड़ें उजागर करना और विश्वविद्यालयों में फर्जी डिग्री वितरण के तरीकों को पूरी तरह से जांचना है।







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