नोएडा में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां अपराधियों ने एक सेवानिवृत्त रेलवे अधिकारी को ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर करीब तीन हफ्ते तक मानसिक दबाव में रखकर 18 लाख रुपये ठग लिए। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
ग्रेटर नोएडा के रहने वाले 69 वर्षीय तिरुमले नाम्बी को 12 मार्च को एक अनजान कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को Mumbai Crime Branch का अधिकारी बताया और दावा किया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर Canara Bank में एक खाता खोला गया है, जो मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल हो रहा है।
ठगों ने गिरफ्तारी का डर दिखाते हुए उन्हें लगातार दबाव में रखा। भरोसा दिलाने के लिए व्हाट्सऐप कॉल, फर्जी दस्तावेज और नकली पहचान पत्र का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद पीड़ित को ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लिया गया, जिसमें उन्हें 21 दिनों तक किसी से संपर्क न करने और पूरी गोपनीयता बनाए रखने को कहा गया।
इस दौरान डर और भ्रम की स्थिति में रखकर ठगों ने उनके बैंकिंग डिटेल हासिल कर लिए। 18 मार्च को आरटीजीएस के जरिए उनके खाते से 18 लाख रुपये निकालकर Utkarsh Small Finance Bank के एक खाते में ट्रांसफर करा लिए गए।
जब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ, तो उन्होंने तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई और बाद में स्थानीय साइबर थाने में एफआईआर कराई।
कैसे होता है ‘डिजिटल अरेस्ट’ फ्रॉड?
इस तरह के साइबर अपराध में ठग खुद को पुलिस, सीबीआई या अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों में डर पैदा करते हैं। वे कहते हैं कि पीड़ित का नाम किसी गंभीर अपराध में जुड़ा है और तुरंत सहयोग न करने पर गिरफ्तारी हो सकती है। इसके बाद वीडियो कॉल, नकली दस्तावेज और आईडी के जरिए भरोसा जीतकर पैसे ट्रांसफर करवाए जाते हैं या निजी जानकारी हासिल की जाती है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ऐसे किसी भी कॉल या संदेश पर भरोसा न करें और तुरंत इसकी सूचना साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी थाने में दें।








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