नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन को लेकर डीएमके ने अपना रुख बदलते हुए अब उनका समर्थन किया है। एक दिन पहले राहुल गांधी के रुख पर सवाल उठाने वाली पार्टी ने बुधवार को कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सरकार के खिलाफ आवाज उठाना हर नागरिक का अधिकार है।
डीएमके प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने कहा कि अगर चुनाव आयोग के शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति पर लोकतंत्र के खिलाफ काम करने के आरोप लग रहे हैं, तो ऐसे में चुनाव की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्ति को पद से हटाया जाना चाहिए।
एलंगोवन के मुताबिक, सरकार की नीतियों या फैसलों के खिलाफ विरोध दर्ज कराना लोकतांत्रिक अधिकार है। राहुल गांधी ने मंगलवार को जो कदम उठाया, वह इसी अधिकार के तहत था और इसे गलत नहीं कहा जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राहुल गांधी के विरोध को रोकना चाहती है।
एक दिन पहले राहुल गांधी पर DMK ने उठाए थे सवाल
डीएमके का ताजा बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि एक दिन पहले ही पार्टी की ओर से राहुल गांधी के रुख पर सवाल खड़े किए गए थे। 6 अक्टूबर को दिल्ली में राहुल गांधी चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे।
राहुल गांधी की प्रमुख मांगों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को वापस लेना और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाना शामिल था।
इसी दौरान डीएमके ने तमिलनाडु में SIR को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी की भूमिका पर सवाल उठाए थे। पार्टी का कहना था कि तमिलनाडु में इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।
विपक्ष की बैठक से भी DMK ने बनाई थी दूरी
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों की ओर से देशव्यापी विरोध की रणनीति तैयार करने के लिए आयोजित बैठक में भी डीएमके शामिल नहीं हुई थी। हालांकि, पार्टी ने यह स्पष्ट संकेत जरूर दिए थे कि वह चुनावी प्रक्रिया से जुड़े इस मुद्दे पर विपक्ष की चिंताओं से पूरी तरह अलग नहीं है।
अब डीएमके के प्रवक्ता का राहुल गांधी के प्रदर्शन को सही ठहराना राजनीतिक तौर पर अहम माना जा रहा है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि चुनाव आयोग और SIR के मुद्दे पर पार्टी विपक्ष के व्यापक अभियान के साथ खड़ी हो सकती है।
फिलहाल राहुल गांधी या कांग्रेस की ओर से डीएमके के बदले हुए रुख पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस और DMK में बढ़ी दूरी
कांग्रेस और डीएमके के रिश्तों में पिछले कुछ समय से पहले जैसी गर्मजोशी नहीं दिखाई दे रही है। 2026 के विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद दोनों दलों के बीच राजनीतिक दूरी बढ़ने की चर्चा तेज हुई थी।
बताया जा रहा है कि कांग्रेस द्वारा सत्तारूढ़ टीवीके को समर्थन देने के बाद डीएमके और कांग्रेस के बीच मतभेद और गहरे हो गए। दोनों दलों के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक समीकरणों पर भी इसका असर पड़ा।
ऐसे में राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन को लेकर डीएमके का समर्थन सामने आना महत्वपूर्ण है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि SIR, चुनाव आयोग और मतदाता सूची के मुद्दे पर कांग्रेस और डीएमके किस तरह एक साथ दिखाई देते हैं।

