
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के चित्रकूट (Chitrakoot) जिले में मंदाकिनी नदी के किनारे सैकड़ों सालों से लगते आ रहे गधों के मेलों (Donkey fair) में इस बार सलमान (Salman) और कैटरीना (Katrina) की धूम मची। हालांकि माल ढुलाई में गधों व खच्चरों की मांग घटने के चलते मेले का कारोबार साल दर साल घटता जा रहा है पर इसके बाद भी इस बार दो दिनों में करीब 1.5 से 02 करोड़ रुपये की बिक्री हुई है।
चित्रकूट में हर साल लगने वाले गधों व खच्चरों के इस मेले में इस बार भी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ से लेकर बिहार तक से खरीददार उमड़े. जहां बाजार की मांग के मुताबिक खच्चरों की बिक्री ज्यादा रही वहीं गधों का भी कारोबार हुआ है। इस बार मेले में सबसे महंगी बिक्री (bid high) सलमान नाम के खच्चर के 1.10 लाख में हुई है जबकि कैटरीना नाम की खच्चर की बोली मेरठ के खरीददार ने 41000 रुपये लगायी। गोवर्धन पूजा से लगने वाले इस तीन दिनी मेले में जहां बिक्री के लिए दूर-दराज से व्यापारी गधों व खच्चरों को लेकर आए वहीं खरीददार भी कई राज्यों से आए।
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बीते 300 सालों से औरंगजेब के समय से लग रहे चित्रकूट के इस अनोखे मेले में खरीद-फरोख्त जरुर पहले जैसी नहीं रही है पर अब भी रौनक में कमी नहीं है। मेला ठेकेदार आशीष त्रिवेदी बताते हैं कि नए जमाने में गधों व खच्चरों से ढुलाई का चलन काफी घटा है और उसी अनुपात में इनकी खरीद और बिक्री भी कम हो गयी है।
हालांकि इस सबके बाद भी इस बार के मेले में पहले दो दिनों में ही 2000 से ज्यादा गधे व खच्चर बिक गए थे। वह कहते हैं कोरोना काल में मेला दो सालों तक बंद रहा उसके बाद पिछले साल से इसकी शुरुआत हुई। पिछले साल भी कारोबार ठंडा था पर इस बार ज्यादा बिक्री का अनुमान था। पिछले साल की बिक्री तीन करोड़ रुपये की हुई। इस साल अभी अंतिम आंकड़े नहीं मिले हैं पर कारोबार उम्मीद के मुताबिक नहीं दिखा है।
मेले में हर साल खच्चर बेंचने आ रहे हकीम बताते हैं कि अनुमान तो 5000 से ज्यादा जानवरों की बिक्री का था पर उस हिसाब के हुई नहीं है। उनका कहना है कि शहरों में गधों व खच्चरों को पालने की न तो जगह बची है और न ही उनसे ढुलाई ज्यादा हो रही है। हकीम के मुताबिक सबसे ज्यादा ईंट भट्ठा मालिक ही गधों व खच्चरों का उपयोग कर रहे हैं और वह भी गांवों व छोटे कस्बों में।
इस बार के मेले में सलमान नाम के खच्चर की बोली सबसे ज्यादा 1.10 लाख रुपये तो शाहरुख की 65000 रुपये लगायी गयी। चित्रकूट के स्थानीय निवासी अशोक मिश्रा बताते हैं कि मेले में आकर्षण लाने के लिए गधों व खच्चरों को फिल्मी सितारों का नाम दिया जाता है। चित्रकूट में लगने वाले गधों के इस मेले के लिए जमीन वहां कि नगर पंचायत उपलब्ध कराती है और प्रति खरीददार व विक्रेता 300 रुपये का प्रवेश शुल्क लिया जाता है।
Source Agency News








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