अयोध्या जिले में शारदा सहायक नहर पर निर्भर लगभग दो लाख किसान इस समय राहत और चिंता दोनों का सामना कर रहे हैं। करीब एक महीने के लंबे इंतजार के बाद मुख्य नहर में पानी तो पहुंच गया है, लेकिन अब तक माइनर और गुलों में पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो सकी है। इसके कारण खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है और किसानों को सिंचाई में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इस समय गेहूं की कटाई पूरी होने के बाद किसान जायद की फसलों जैसे गन्ना, मक्का और सब्जियों की खेती में जुटे हुए हैं। इन फसलों के लिए समय-समय पर सिंचाई बेहद जरूरी होती है, लेकिन माइनर सूखे होने से फसलें प्रभावित हो रही हैं। हालांकि मुख्य नहर में पानी आने से आसपास के तालाबों और पोखरों में जलस्तर बढ़ा है, जिससे थोड़ी बहुत राहत जरूर मिली है।
इसी बीच पिछले दो दिनों में आई तेज आंधी और बारिश ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। गन्ना की फसल को जहां बारिश से कुछ फायदा हुआ, वहीं मक्का और सब्जी की फसल को भारी नुकसान हुआ है। तेज हवाओं के कारण कई खेतों में सब्जियों के पौधे गिर गए और क्षतिग्रस्त हो गए। फल देने वाली सब्जियां सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं, कई पौधे टूट गए हैं और कुछ सूखने की कगार पर हैं। वहीं मक्के की फसल भी आंधी के कारण जमीन पर गिर गई है, जिससे उत्पादन घटने की आशंका बढ़ गई है।
किसानों का कहना है कि अगर जल्द ही माइनर और गुलों में पानी नहीं छोड़ा गया तो जायद की फसलें गंभीर संकट में आ सकती हैं। नलकूप के जरिए सिंचाई करना महंगा पड़ रहा है, जिससे उनकी लागत बढ़ रही है। किसानों ने सिंचाई विभाग से जल्द से जल्द पानी उपलब्ध कराने की मांग की है।
वहीं सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मुख्य नहर में पानी का स्तर स्थिर होने के बाद ही माइनरों में पानी छोड़ा जाएगा। उनके अनुसार नहर के अंतिम छोर तक पानी पहुंचने में अभी 3 से 4 दिन का समय और लग सकता है।







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