तीस हजारी कोर्ट ने 26 साल पुराने एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए सीबीआई के जॉइंट डायरेक्टर रमनीश और रिटायर्ड एसीपी विवेक पांडे समेत दो अधिकारियों को सजा सुनाई है। यह मामला पूर्व आईआरएस अधिकारी अशोक अग्रवाल की शिकायत पर दर्ज किया गया था।
यह केस साल 2000 में दर्ज हुआ था, जिसमें एक आईआरएस अधिकारी की गिरफ्तारी और छापेमारी के दौरान मारपीट और आपराधिक अतिक्रमण के आरोप लगाए गए थे। अदालत ने 18 अप्रैल को ही दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया था, जिसके बाद सजा पर सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता के वकील ने अदालत से कड़ी सजा की मांग की। उन्होंने दलील दी कि पीड़ित को 38 दिन तक जेल में रहना पड़ा और उसे न्याय पाने के लिए 26 वर्षों तक इंतजार करना पड़ा। साथ ही यह भी कहा गया कि इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सिस्टम का दुरुपयोग किया गया।
वहीं, बचाव पक्ष के वकील ने सजा में नरमी की अपील करते हुए कहा कि दोनों अधिकारी अपनी ड्यूटी के तहत कार्रवाई कर रहे थे और उनका शिकायतकर्ता से कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं था। उन्होंने यह भी बताया कि आरोपियों ने लंबे समय तक ट्रायल और विभागीय जांच का सामना किया है, इसलिए मानवीय आधार पर सजा कम करने की मांग की गई।
अदालत ने सजा सुनाने के साथ ही आरोपियों को फैसले को उच्च अदालत में चुनौती देने के लिए जमानत भी प्रदान की है।






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