उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी अध्यक्ष Akhilesh Yadav की बेटी अदिति यादव को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए कथित आपत्तिजनक पोस्ट के बाद विवाद गहरा गया है। मामले में कानपुर में तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है और पुलिस जांच में जुट गई है।
शिकायत के अनुसार, सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की गई थी जिसमें अदिति यादव के बारे में कथित रूप से भ्रामक और आपत्तिजनक दावे किए गए। आरोप है कि पोस्ट में एक तस्वीर को संपादित कर गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया।
साइबर थाने में दर्ज हुई शिकायत
मामले की शिकायत समाजवादी विचारधारा से जुड़े एक पदाधिकारी द्वारा साइबर पुलिस थाने में दर्ज कराई गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि सोशल मीडिया के जरिए झूठी जानकारी फैलाकर राजनीतिक परिवार की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने की कोशिश की गई।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर तीन नामजद व्यक्तियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत मामला दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है और संबंधित खातों की गतिविधियों का विश्लेषण किया जा रहा है।
सपा नेताओं ने जताई नाराजगी
मामले को लेकर समाजवादी पार्टी के कई नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पार्टी नेताओं का कहना है कि राजनीतिक मतभेदों के नाम पर किसी के परिवार, खासकर महिलाओं और बेटियों को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं है।
कई नेताओं ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि व्यक्तिगत और पारिवारिक स्तर पर की जाने वाली टिप्पणियां लोकतांत्रिक संवाद की मर्यादा के खिलाफ हैं। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
कार्रवाई की मांग तेज
पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने भी संबंधित अधिकारियों को शिकायतें सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। कुछ संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपना सकते हैं।
पुलिस ने शुरू की जांच
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच जारी है और सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री की सत्यता, स्रोत तथा उसके प्रसार की पूरी पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
यह मामला सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक और आपत्तिजनक सामग्री के दुष्प्रभावों को एक बार फिर सामने लाता है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि विवादित सामग्री किस उद्देश्य से साझा की गई और इसके पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं।







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