चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के करीब अपने दो महत्वपूर्ण एयरबेस पर पांचवीं पीढ़ी के J-20 स्टेल्थ फाइटर जेट की तैनाती बढ़ा दी है। हाल ही में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों में इन लड़ाकू विमानों को शिंजियांग के होटन एयरबेस और तिब्बत के डैमशुंग एयरबेस पर देखा गया है। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद भारत-चीन सीमा पर सैन्य गतिविधियों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
बताया जा रहा है कि होटन एयरबेस पूर्वी लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी (DBO) सेक्टर के अपेक्षाकृत करीब स्थित है, जबकि डैमशुंग एयरबेस अरुणाचल प्रदेश के तवांग क्षेत्र की दिशा में रणनीतिक महत्व रखता है। दोनों एयरबेस से चीन सीमावर्ती इलाकों में अपने हवाई अभियानों की क्षमता को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
आठ साल बाद अपग्रेडेड J-20 की तैनाती
रिपोर्टों के अनुसार, चीन ने J-20 फाइटर जेट में बड़े तकनीकी बदलाव किए हैं। विमान में अब स्वदेशी इंजन और उन्नत एवियोनिक्स सिस्टम लगाए गए हैं। इससे पहले शुरुआती मॉडल में रूसी इंजन का इस्तेमाल किया जाता था। चीन का दावा है कि यह अपग्रेडेड संस्करण पहले की तुलना में अधिक शक्तिशाली और प्रभावी है।
पहले भी सीमा के पास दिख चुका है J-20
यह पहली बार नहीं है जब चीन ने LAC के नजदीक J-20 तैनात किया हो। इससे पहले भी तिब्बत के शिगात्से एयरबेस पर इन विमानों की मौजूदगी सामने आ चुकी थी। उस समय इसे भारतीय वायुसेना द्वारा सिक्किम क्षेत्र में राफेल लड़ाकू विमानों की तैनाती के जवाब के रूप में देखा गया था।
क्या J-20 वास्तव में पूरी तरह स्टेल्थ है?
J-20 को चीन पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर जेट बताता है, लेकिन कई अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञ इसके स्टेल्थ प्रदर्शन को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। पहले भी ऐसी जानकारी सामने आई थी कि भारतीय वायुसेना के सुखोई-30MKI लड़ाकू विमान ने सीमा के पास उड़ान भर रहे J-20 को ट्रैक किया था। इसके बाद चीन ने लंबे समय तक इस विमान की सार्वजनिक गतिविधियां सीमित कर दी थीं।
भारतीय वायुसेना की तैयारी
भारत की ओर से पूर्वी और उत्तर-पूर्वी सेक्टर में राफेल और सुखोई-30MKI जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान पहले से तैनात हैं। पश्चिम बंगाल के हासीमारा एयरबेस पर राफेल स्क्वाड्रन मौजूद है, जबकि असम के तेजपुर सहित अन्य अग्रिम एयरबेस पर सुखोई विमान सीमा की निगरानी करते हैं।
AMCA पर तेजी से काम
भारत फिलहाल स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) कार्यक्रम पर काम कर रहा है। इस परियोजना के पूरा होने में अभी कई वर्ष लग सकते हैं। तब तक भारतीय वायुसेना की मुख्य ताकत राफेल, सुखोई-30MKI और अन्य आधुनिक लड़ाकू विमान बने रहेंगे।
J-20 बनाम राफेल
चीन का J-20 लंबी दूरी की PL-15 एयर-टू-एयर मिसाइल से लैस है, जबकि भारतीय राफेल में Meteor मिसाइल का इस्तेमाल होता है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, Meteor का बड़ा “नो-एस्केप ज़ोन” और रैमजेट तकनीक उसे हवाई मुकाबले में महत्वपूर्ण बढ़त दे सकती है। हालांकि किसी भी संभावित संघर्ष की वास्तविक स्थिति कई अन्य कारकों जैसे पायलट की क्षमता, नेटवर्किंग, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और ऑपरेशन की रणनीति पर भी निर्भर करती है।
सीमा पर बढ़ी सतर्कता
सीमा क्षेत्रों में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर भारत लगातार नजर बनाए हुए है। दोनों देशों के बीच सैन्य और राजनयिक स्तर पर संवाद जारी है, लेकिन LAC के आसपास हवाई और जमीनी तैनाती पर दोनों पक्ष विशेष ध्यान दे रहे हैं। ऐसे में J-20 की नई तैनाती को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।







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