पीलीभीत: ट्रांस शारदा क्षेत्र में शारदा नदी का तेज कटान एक बार फिर ग्रामीणों के लिए बड़ी चिंता बन गया है। ग्राम हजारा के आसपास नदी का बहाव तेज होने से कृषि भूमि को लगातार नुकसान पहुंच रहा है। कई किसानों की उपजाऊ जमीन नदी की चपेट में आ गई है, जबकि खेतों में खड़ी गन्ने की फसल भी जलमग्न हो गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर नदी के कटान को रोकने के लिए जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। हजारा के अलावा शास्त्रीनगर, सिद्धनगर और भरतपुर समेत आसपास के कई गांवों पर भी खतरा बढ़ गया है।
किसानों की जमीन और फसल को भारी नुकसान
शारदा नदी के तेज बहाव के चलते क्षेत्र में लगातार भू-कटान हो रहा है। आधा दर्जन से ज्यादा किसानों की कई एकड़ कृषि भूमि प्रभावित होने की बात सामने आई है। खेतों में पानी पहुंचने से गन्ने की फसल को भी नुकसान हुआ है।
ग्रामीणों के मुताबिक नदी का कटान इसी तरह जारी रहा तो बड़ी मात्रा में कृषि भूमि नदी में समा सकती है। इससे किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा होने के साथ-साथ कई परिवारों के सामने भविष्य में विस्थापन की स्थिति भी पैदा हो सकती है।
कई गांवों के अस्तित्व पर संकट
ग्रामीणों ने बताया कि शारदा नदी का रुख लगातार आबादी और कृषि क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है। हजारा के साथ शास्त्रीनगर, सिद्धनगर और भरतपुर जैसे गांव भी इसकी चपेट में आने की आशंका से परेशान हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि अभी समय रहते मजबूत कटानरोधी व्यवस्था कर दी जाए तो नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है। लेकिन यदि प्रशासन ने देरी की तो बाढ़ और भू-कटान से दर्जनों गांव प्रभावित हो सकते हैं।
निर्माणाधीन पुल पर भी खतरे की आशंका
धनाराघाट क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत से पुल का निर्माण कार्य चल रहा है। नदी के बढ़ते कटान और तेज बहाव को देखते हुए ग्रामीणों ने निर्माणाधीन पुल की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है।
ग्रामीणों का कहना है कि नदी के बहाव को नियंत्रित करने और किनारों को सुरक्षित रखने के लिए मजबूत तकनीकी उपाय किए जाने जरूरी हैं, ताकि पुल के निर्माण पर भी इसका प्रतिकूल असर न पड़े।
नदी किनारे जुटे ग्रामीण, प्रशासन के खिलाफ जताई नाराजगी
कटान की समस्या को लेकर मंगलवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण नदी के किनारे एकत्र हुए और प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि हर साल बरसात के दौरान शारदा नदी का कटान तेज हो जाता है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं होने के कारण किसानों को बार-बार नुकसान उठाना पड़ता है।
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ स्थानीय प्रशासन से तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू कराने की मांग की है।
स्टड और स्पर निर्माण की उठी मांग
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने नदी के कटान को रोकने के लिए प्रभावी तकनीकी उपाय लागू करने की मांग की। ग्रामीणों के अनुसार नदी के संवेदनशील हिस्सों में स्टड और स्पर का निर्माण कराया जाना चाहिए, जिससे नदी के बहाव का दबाव कम किया जा सके और कृषि भूमि व आबादी को सुरक्षित रखा जा सके।
ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें केवल अस्थायी या दिखावटी काम नहीं चाहिए, बल्कि ऐसी व्यवस्था की जरूरत है जो लंबे समय तक गांवों और किसानों की जमीन को नदी के कटान से बचा सके।
पिछले साल भी नदी में समा चुकी है किसानों की जमीन
स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले वर्ष भी शारदा नदी के कटान ने क्षेत्र में काफी नुकसान पहुंचाया था। कई किसानों की कृषि भूमि नदी में समा गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि उस समय भी समस्या को लेकर क्षेत्रीय विधायक बाबूराम पासवान को जानकारी दी गई थी।
ग्रामीणों का आरोप है कि समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए और उन्हें आश्वासन के अलावा कुछ खास हासिल नहीं हुआ।
ग्रामीणों ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने साफ कहा कि यदि जल्द ही कटानरोधी कार्य शुरू नहीं हुए तो समस्या और गंभीर हो सकती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से नदी के संवेदनशील क्षेत्रों का तत्काल निरीक्षण कराने और विशेषज्ञों की निगरानी में सुरक्षा कार्य शुरू कराने की मांग की है।
प्रदर्शन में राकेश यादव, ग्राम पंचायत सदस्य परमात्मा, रामचंद्र लाल, राधेश्याम, रामलखन, रामकिशोर, रजनीश कुशवाहा, लक्ष्मण, पुतूलाल और हरसुवरन लाल समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
ग्रामीणों का कहना है कि शारदा नदी के कटान को केवल मौसमी समस्या मानकर छोड़ना ठीक नहीं होगा। समय रहते स्थायी सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई तो किसानों की जमीन, फसल और गांवों की सुरक्षा पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।







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