Monday, August 03, 2026

राष्ट्रीय

Bengal Politics: मिड-डे-मील में अंडे को लेकर घमासान, TMC ने सरकार के फैसले पर उठाए सवाल; कुणाल घोष की बड़ी मांग

Bengal Politics: मिड-डे-मील में अंडे को लेकर घमासान, TMC ने सरकार के फैसले पर उठाए सवाल; कुणाल घोष की बड़ी मांग

पश्चिम बंगाल में सरकारी स्कूलों के मिड-डे-मील में बच्चों को अंडा दिए जाने को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। राज्य सरकार की ओर से स्कूलों में बच्चों को सप्ताह में दो दिन मिड-डे-मील के साथ अंडा देने की व्यवस्था की गई है। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक कुणाल घोष ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि बच्चों को सप्ताह में सिर्फ दो दिन नहीं, बल्कि स्कूल खुलने वाले हर दिन अंडा मिलना चाहिए।

मिड-डे-मील में अंडे को लेकर कुणाल घोष ने क्या कहा?

TMC विधायक कुणाल घोष ने रविवार (2 अगस्त 2026) को कहा कि स्कूली बच्चों के भोजन में अंडे को सिर्फ सप्ताह में दो दिन तक सीमित रखना उचित नहीं है। उनका कहना है कि जिन दिनों स्कूल चलते हैं, उन दिनों बच्चों के मिड-डे-मील में अंडा शामिल किया जाना चाहिए।

उन्होंने दावा किया कि अंडा देने का फैसला उनकी पार्टी की मांग के बाद किया गया है। कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि इससे पहले BJP सरकार ने मिड-डे-मील के मेन्यू से अंडे को पूरी तरह हटाने की कोशिश की थी। उनके मुताबिक, बच्चों के पोषण को देखते हुए अंडे को भोजन का नियमित हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

‘शाकाहारी खाना खाने वालों के लिए अलग विकल्प’

कुणाल घोष ने इस बहस के दौरान इस्कॉन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस्कॉन एक सम्मानित धार्मिक संस्था है और वह खुद भी वहां जाते हैं तथा प्रसाद ग्रहण करते हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थान का भोजन पूरी तरह शाकाहारी होना स्वाभाविक है, लेकिन स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले भोजन को पोषण के नजरिए से भी देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अंडा पोषण का अच्छा स्रोत है और बच्चे भी इसे पसंद करते हैं। जो लोग शाकाहारी भोजन करते हैं, उनके लिए शाकाहारी विकल्प उपलब्ध रह सकते हैं, लेकिन जो बच्चे अंडा खाते हैं, उन्हें इससे वंचित रखने का कोई कारण नहीं होना चाहिए।

TMC विधायक ने कहा कि अंडे को सप्ताह में सिर्फ दो बार देने के बजाय इसे मिड-डे-मील के नियमित मेन्यू का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

बागी सांसदों पर भी कुणाल घोष ने साधा निशाना

कुणाल घोष ने TMC से अलग रुख रखने वाले कुछ सांसदों को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने उनकी राजनीतिक स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकसभा में जब ये सांसद बोलते हैं, तो प्रसारण के दौरान उनकी पहचान अभी भी TMC सांसद के तौर पर दिखाई जाती है।

उन्होंने कहा कि इन सांसदों ने TMC के टिकट पर चुनाव जीता था, लेकिन बाद में BJP के साथ बैठकों में शामिल होते रहे और अब किसी अन्य राजनीतिक संगठन से जुड़ने का दावा कर रहे हैं। कुणाल घोष ने सवाल किया कि जब संसद के रिकॉर्ड में उनकी पहचान अभी भी TMC से जुड़ी हुई है, तो उनकी वास्तविक राजनीतिक पहचान क्या है?

इस तरह पश्चिम बंगाल में स्कूलों के मिड-डे-मील में अंडे को लेकर शुरू हुई चर्चा अब राजनीतिक बयानबाजी का मुद्दा बन गई है। एक तरफ सरकार की ओर से सप्ताह में दो दिन अंडा देने की व्यवस्था की गई है, वहीं TMC इसे बढ़ाकर नियमित किए जाने की मांग कर रही है।

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