Hardoi में गेहूं की कटाई और थ्रेसिंग का कार्य तेज होने के साथ ही इसका असर अब लोगों के स्वास्थ्य पर साफ दिखाई देने लगा है। खेतों में कंबाइन मशीनों और थ्रेसर से उड़ने वाली धूल, मिट्टी और भूसे के महीन कणों ने सांस से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की परेशानी बढ़ा दी है।
इन दिनों बड़ी संख्या में लोग सांस फूलने, खांसी और सीने में जकड़न जैसी शिकायतों के साथ अस्पतालों और निजी क्लीनिकों में पहुंच रहे हैं। खासतौर पर Asthma और Chronic Obstructive Pulmonary Disease (सीओपीडी) से पीड़ित मरीजों की स्थिति अधिक गंभीर हो रही है।
ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर चल रही कटाई के दौरान कंबाइन और थ्रेसर से निकलने वाला भूसा और धूल वातावरण में घुलकर हवा को प्रदूषित कर रहा है। ये सूक्ष्म कण सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सीधे फेफड़ों को प्रभावित करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक ऐसे माहौल में रहने से स्वस्थ व्यक्ति भी श्वास संबंधी समस्याओं का शिकार हो सकता है।
जिले के अस्पतालों में श्वसन रोगियों की संख्या में करीब 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कई मरीज अचानक सांस लेने में दिक्कत और लगातार खांसी की शिकायत के साथ उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, धूल और भूसे के बेहद महीन कण एलर्जी को बढ़ावा देते हैं और अस्थमा के दौरे को गंभीर बना सकते हैं। ये कण इतने सूक्ष्म होते हैं कि आंखों से दिखाई नहीं देते, लेकिन सांस के साथ फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं। ओपीडी में भी सांस से जुड़ी समस्याओं वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है, खासकर उन लोगों को जिन्हें पहले से सांस या एलर्जी की समस्या है। बाहर निकलते समय मास्क या कपड़े से मुंह ढकने, धूल भरे स्थानों से दूर रहने और नियमित दवाएं जारी रखने की सलाह दी गई है। बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद न करने को भी जरूरी बताया गया है।
इसके अलावा पर्याप्त पानी पीने, साफ वातावरण में रहने और सांस लेने में किसी भी तरह की परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करने की अपील की गई है। कटाई के इस मौसम में थोड़ी सावधानी अपनाकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है।








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