डिजिटल अरेस्ट के नाम पर हुई बड़ी साइबर ठगी के मामले में ED ने बड़ी कार्रवाई की है. जालंधर जोनल ऑफिस की टीम ने सोमवार को पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और असम में 11 ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की. ये कार्रवाई PMLA के तहत चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच में की गई. छापेमारी के दौरान कई दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस बरामद कर जब्त किए गए हैं.
ED ने ये जांच लुधियाना साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR के आधार पर शुरू की थी. बाद में इसी गैंग से जुड़े डिजिटल अरेस्ट/साइबर क्राइम के 9 और एफआईआर अलग-अलग पुलिस एजेंसियों की ओर से दर्ज हुए, जिन्हें इसी जांच में शामिल किया गया.
ईडी की जांच में क्या हुआ खुलासा?
जांच में सामने आया कि लुधियाना के जाने-माने उद्योगपति एसपी ऑस्वाल को ठगों ने सीबीआई अफसर बनकर और फर्जी सरकारी और न्यायिक दस्तावेज दिखाकर डिजिटल अरेस्ट में फंसाया. इसके बाद उनसे करीब 7 करोड़ रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लिए गए. इनमें से 5.24 करोड़ रुपये बाद में खातों से रिकवर कर पीड़ित को वापस कर दिए गए, जबकि बाकी रकम फेक अकाउंट्स में भेज दी गई.
रूमी कलिता को ठगी की रकम का मिलता था कमीशन
ED के मुताबिक, ये फेक अकाउंट्स मजदूरों, डिलीवरी बॉय जैसे लोगों के नाम पर थे. पैसा इन खातों में आते ही या तो आगे ट्रांसफर कर दिया गया या तुरंत कैश में निकाल लिया गया. जांच में ये भी पता चला कि इन खातों की लॉग-इन डिटेल्स एक महिला रूमी कलिता इस्तेमाल करती थी. बदले में उसे ठगी की रकम का कुछ प्रतिशत कमीशन मिलता था. सबूत बताते हैं कि वो पैसे की लेयरिंग और डायवर्जन में गहराई से शामिल थी.
रूमी कलिता को PMLA कोर्ट ने 10 दिन की रिमांड में भेजा
छापेमारी के बाद मंगलवार (23 दिसंबर, 2025) को रूमी कलिता को गिरफ्तार किया गया. कामरूप (मेट्रो), गुवाहाटी की CJM कोर्ट से चार दिन की ट्रांजिट रिमांड मिली. इसके बाद उन्हें जालंधर की स्पेशल PMLA कोर्ट में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने 2 जनवरी, 2026 तक 10 दिन की ईडी कस्टडी मंजूर की. ईडी इससे पहले भी 31 जनवरी, 2025 को इस केस में छापेमारी कर चुकी है, तब भी अहम दस्तावेज बरामद हुए थे. ईडी का कहना है कि जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े और लोगों पर कार्रवाई हो सकती है.







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