Thursday, February 05, 2026

राष्ट्रीय

विधान परिषद से इस्तीफा, BRS से अलग हुईं के. कविता; भावुक विदाई के साथ नई सियासी शुरुआत

विधान परिषद से इस्तीफा, BRS से अलग हुईं के. कविता; भावुक विदाई के साथ नई सियासी शुरुआत

 

तेलंगाना की राजनीति में एक बड़े अध्याय का औपचारिक अंत हो गया है. भारत राष्ट्र समिति (BRS) की कल्वाकुंतला कविता का विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से दिया गया इस्तीफा आखिरकार मंजूर कर लिया गया है. विधान परिषद के चेयरमैन गुत्ता सुखेंद्र रेड्डी ने सोमवार को सदन में कविता के भावुक संबोधन के बाद यह बड़ा फैसला लिया.

विधायी सचिव ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है. कविता साल 2021 में निजामाबाद स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र से निर्विरोध विधान परिषद सदस्य चुनी गई थीं. उनके इस्तीफे की मंजूरी के साथ ही अब यह सीट आधिकारिक तौर पर खाली घोषित कर दी गई है, जिससे राज्य में एक और उपचुनाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है.

आंसुओं पर काबू नहीं रख सकीं कविता
इस्तीफा मंजूर होने से पहले सोमवार को परिषद की कार्यवाही के दौरान एक बेहद भावुक दृश्य देखने को मिला. सदन को संबोधित करते हुए कविता अपने आंसुओं पर काबू नहीं रख सकीं. उन्होंने अपनी ही पूर्व पार्टी (BRS) पर तीखे प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि दिल्ली आबकारी नीति मामले में जब केंद्रीय एजेंसियों ने उन्हें निशाना बनाया, तब पार्टी नेतृत्व ने उन्हें अकेला छोड़ दिया.

कविता ने कहा, “मेरे लिए उस पद पर बने रहना नैतिक रूप से गलत था, जो मुझे उस पार्टी से मिला जिससे मेरा अब कोई नाता नहीं है.” उन्होंने BRS के संविधान को एक ‘मजाक’ करार दिया और आरोप लगाया कि पार्टी अब केवल उन लोगों का अड्डा बन गई है, जिन्होंने तेलंगाना आंदोलन को धोखा दिया था.

कब दिया था इस्तीफा
के. कविता ने 3 सितंबर 2025 को ही BRS की प्राथमिक सदस्यता और MLC पद से इस्तीफा दे दिया था. यह कदम उनके निलंबन के ठीक एक दिन बाद उठाया गया था. हालांकि चेयरमैन ने उस वक्त उनके इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया था. हाल ही में 2 जनवरी को उन्होंने व्यक्तिगत रूप से चेयरमैन से मुलाकात कर अपनी बात रखने का मौका मांगा था, जिसके बाद सोमवार को इस पर अंतिम मुहर लगी.

इस्तीफे की असल वजह
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कविता अब अपने संगठन ‘तेलंगाना जागृति’ को एक पूर्ण राजनीतिक दल के रूप में बदलने की तैयारी कर रही हैं. उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वह आगामी विधानसभा चुनावों में एक नई ताकत के रूप में उभरेंगी. उनके इस कदम ने न केवल BRS के भीतर की दरार को उजागर किया है, बल्कि तेलंगाना की त्रिकोणीय राजनीति में एक नया समीकरण भी पैदा कर दिया है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *