Tuesday, April 07, 2026

उत्तर प्रदेश

Chitrakoot में रात के अंधेरे में खनन का धंधा, ब्लास्टिंग से सहमे लोग; प्रशासन की भूमिका पर सवाल

Chitrakoot में रात के अंधेरे में खनन का धंधा, ब्लास्टिंग से सहमे लोग; प्रशासन की भूमिका पर सवाल

Chitrakoot जिले के Bharatkoop थाना क्षेत्र में अवैध खनन का सिलसिला लगातार जारी है। आरोप है कि यहां शाम ढलते ही पहाड़ी इलाकों में भारी मशीनों के जरिए खनन कार्य शुरू हो जाता है, जो पूरी रात चलता रहता है। जबकि नियमों के अनुसार शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक खनन गतिविधियों पर पूरी तरह रोक है, लेकिन इन नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह अवैध खनन बिना विभागीय मिलीभगत के संभव नहीं है। उन्होंने जिला खनिज अधिकारी Ranveer Singh पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके संरक्षण में ही रात के समय खनन कराया जा रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि नियमों की अनदेखी के बदले अवैध रूप से धन लिया जाता है, जिसके कारण शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होती।

मौके पर की गई पड़ताल में सामने आया कि शाम होते ही पहाड़ों पर ब्लास्टिंग शुरू हो जाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, चट्टानों में कई इंच गहराई तक विस्फोट किए जाते हैं, जिससे जोरदार धमाकों की आवाज दूर तक सुनाई देती है और पूरे क्षेत्र में धुएं के गुबार फैल जाते हैं।

जांच के दौरान यह भी देखा गया कि रात में पोकलैंड मशीनों और हाइवा जैसे भारी वाहनों के जरिए बड़े पैमाने पर पत्थरों की लोडिंग की जा रही है। इससे साफ संकेत मिलता है कि यह खनन कार्य छोटे स्तर पर नहीं, बल्कि संगठित तरीके से किया जा रहा है। लगातार मशीनों की आवाज और वाहनों की आवाजाही से इलाके का सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है।

इस अवैध गतिविधि का असर पर्यावरण पर भी गंभीर रूप से पड़ रहा है। पहाड़ों की कटाई, धूल और धुएं के कारण प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है। साथ ही तेज धमाकों और भारी वाहनों की वजह से ग्रामीणों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है, जिससे लोगों में डर और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।

जब इस मामले पर जिला खनिज अधिकारी Ranveer Singh से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि यदि कहीं अवैध खनन हो रहा है तो जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार शिकायत के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

वहीं इस पूरे मामले में जिले के डीएम Pulkit Garg की जानकारी और निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की, तो आने वाले समय में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

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