उत्तर प्रदेश के 558 सहायता प्राप्त मदरसों की जांच के आदेश को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में आज अहम सुनवाई होने जा रही है। यह मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) द्वारा आर्थिक अपराध शाखा (EOW) से जांच कराने के निर्देश के खिलाफ दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया की ओर से दाखिल की गई है।
इससे पहले 29 अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने NHRC की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा था कि आयोग मदरसों की जांच जैसे मामलों में सक्रिय दिखाई देता है, लेकिन मॉब लिंचिंग, भीड़ हिंसा और सतर्कतावादी हमलों जैसे मामलों में अक्सर चुप्पी साध लेता है।
जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस विवेक सरन की खंडपीठ ने कहा था कि अदालत के सामने ऐसे उदाहरण नहीं आए हैं, जहां मानवाधिकार आयोग ने मुस्लिम समुदाय के लोगों पर हमलों या भीड़ हिंसा के मामलों में स्वतः संज्ञान लिया हो। कोर्ट ने यह भी कहा कि अलग-अलग समुदायों के लोगों के आपसी संबंधों को लेकर होने वाली प्रताड़ना और कानून हाथ में लेने वाली घटनाओं पर आयोग की निष्क्रियता चिंता का विषय है।
मामले में NHRC के सामने की गई शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कुछ मदरसे अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से नियमों का पालन किए बिना सरकारी अनुदान प्राप्त कर रहे हैं। साथ ही रिश्वत और कमीशन के जरिए अयोग्य शिक्षकों की नियुक्ति करने के आरोप भी लगाए गए थे।
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि कथित घटनाओं के एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद मानवाधिकार आयोग को जांच का आदेश देने का अधिकार नहीं है। इस पर हाईकोर्ट पहले ही जांच आदेश पर अंतरिम रोक लगा चुका है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि राष्ट्रीय और राज्य मानवाधिकार आयोग कई बार अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर हस्तक्षेप कर रहे हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि मानवाधिकार आयोग कोई न्यायाधिकरण नहीं है, जो सीधे मामलों की जांच या परीक्षण करे। यदि किसी मामले में हस्तक्षेप जरूरी लगे तो आयोग अदालत का रुख कर सकता है या एफआईआर दर्ज कराने की सिफारिश कर सकता है, लेकिन सीधे जांच के आदेश देने की उसकी शक्ति सीमित है, खासकर तब जब मामला सीधे मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़ा न हो।
कोर्ट ने यह मानते हुए कि मामले में अधिकार क्षेत्र का सवाल गंभीर है, NHRC को नोटिस जारी किया था और अंतरिम आदेश को बरकरार रखा था। अब इस मामले में आगे की सुनवाई आज होने वाली है।









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