अमेरिका ने एक बार फिर ईरान से जुड़े सैन्य और तकनीकी नेटवर्क पर बड़ा कदम उठाया है। ट्रंप प्रशासन ने 8 मई को तीन चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। इन कंपनियों पर आरोप है कि इन्होंने ईरान को सैटेलाइट इमेजरी उपलब्ध कराई, जिसका इस्तेमाल मध्य पूर्व में अमेरिकी और सहयोगी सैन्य ठिकानों के खिलाफ हमलों में किया गया।
क्या है पूरा मामला?
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, मध्य पूर्व में चल रहे ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ के दौरान कुछ संवेदनशील सैटेलाइट तस्वीरें ईरान तक पहुंचाई गईं। इन तस्वीरों में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों और ठिकानों की जानकारी शामिल होने का दावा किया गया है, जिससे सुरक्षा जोखिम पैदा हुआ।
अमेरिका का कहना है कि यह कदम उसके सैनिकों और सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है और ऐसे किसी भी सहयोग का कड़ा जवाब दिया जाएगा।
किन कंपनियों पर लगा प्रतिबंध?
प्रतिबंध सूची में चीन की तीन कंपनियां शामिल हैं:
- हांगझोउ स्थित मिजारविजन (MiEntropy Technology Company)
आरोप है कि इस कंपनी ने ओपन-सोर्स सैटेलाइट डेटा साझा किया, जिसमें अमेरिकी सैन्य गतिविधियों से जुड़ी जानकारी शामिल थी। - बीजिंग स्थित द अर्थ आई (The Earth Eye)
इस पर सीधे ईरान को सैटेलाइट इमेजरी उपलब्ध कराने का आरोप है। - चांग गुआंग सैटेलाइट टेक्नोलॉजी कंपनी
आरोप है कि इस कंपनी ने ईरान के अनुरोध पर अमेरिकी और सहयोगी देशों के सैन्य ठिकानों की तस्वीरें जुटाईं।
पहले भी लग चुके हैं आरोप
अमेरिका ने यह भी कहा कि चांग गुआंग सैटेलाइट टेक्नोलॉजी कंपनी पहले भी प्रतिबंधों का सामना कर चुकी है। उस समय उस पर यमन में हूती विद्रोहियों को सैटेलाइट जानकारी देने के आरोप लगे थे, जिससे अमेरिकी ठिकानों पर हमलों में मदद मिली थी।
ईरान के रक्षा नेटवर्क पर भी कार्रवाई
अमेरिकी विदेश विभाग ने ईरान के रक्षा मंत्रालय से जुड़े निर्यात नेटवर्क ‘मिनडेक्स’ पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। इसके अलावा ड्रोन और मिसाइल कार्यक्रम से जुड़े 10 अन्य संस्थानों और व्यक्तियों को भी सूची में शामिल किया गया है।
इनमें चीन, ईरान, बेलारूस और संयुक्त अरब अमीरात से जुड़े नाम शामिल हैं, जिन पर ईरान के सैन्य कार्यक्रमों को समर्थन देने का आरोप है।
अमेरिका की सख्त चेतावनी
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने कहा है कि वह ईरान के हथियार नेटवर्क और सप्लाई चेन को तोड़ने के लिए लगातार कार्रवाई करता रहेगा। साथ ही यह भी चेतावनी दी गई है कि भविष्य में ऐसे किसी भी सहयोग पर और सख्त कदम उठाए जाएंगे।
निष्कर्ष
यह कार्रवाई अमेरिका और ईरान के बीच पहले से जारी तनाव के बीच एक और बड़ा कूटनीतिक और सुरक्षा कदम माना जा रहा है, जिसमें चीन की तकनीकी कंपनियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।








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