हरदोई जिले के सवायजपुर क्षेत्र के शाहाबुद्दीनपुर और आसपास के गांवों से आए करीब 50 किसानों ने शुक्रवार देर रात कलेक्ट्रेट परिसर में धरना देकर चकबंदी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई। प्रदर्शन में पुरुषों के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल रहीं। किसानों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी अधिकांश कृषि भूमि गंगा और रामगंगा नदियों के बीच स्थित है, जहां हर वर्ष कटान का खतरा बना रहता है। किसानों का आरोप है कि चकबंदी के दौरान उनकी उपजाऊ जमीन को कटरी क्षेत्र की ओर स्थानांतरित कर दिया गया, जबकि सुरक्षित और बेहतर भूमि कुछ अन्य लोगों को आवंटित कर दी गई। उनका दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई।
किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि सर्वेक्षण के समय कई स्थानों पर बोरिंग, पेड़ और कुओं का सही रिकॉर्ड तैयार नहीं किया गया। कुछ किसानों की जमीन का रकबा कम दर्ज किया गया, जबकि भूमि की गुणवत्ता और मालियत से जुड़े रिकॉर्ड में भी कथित गड़बड़ियां की गईं, जिससे कुछ लोगों को लाभ पहुंचा।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने पहले भी संबंधित अधिकारियों से कई बार शिकायत की, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। इसी कारण किसान संगठन के बैनर तले कलेक्ट्रेट परिसर में धरना आयोजित किया गया।
देर रात सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और किसानों से बातचीत कर उनकी शिकायतों को नियमानुसार संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। इसके बाद किसानों ने फिलहाल अपना धरना स्थगित कर दिया। एहतियात के तौर पर कलेक्ट्रेट परिसर में पुलिस बल तैनात रहा और पूरे घटनाक्रम के दौरान स्थिति शांतिपूर्ण बनी रही।








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