आगरा। मौसम में बदलाव के बीच वायरल फीवर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी है। एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में वायरल फीवर के साथ डायरिया और निमोनिया से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण सभी 80 बेड भर गए हैं। मरीजों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने इमरजेंसी के प्रवेश द्वार के पास 12 बेड की ट्रायज यूनिट शुरू की है।
अस्पताल में पहुंच रहे मरीजों में तेज बुखार के साथ सर्दी-जुकाम, खांसी और शरीर में दर्द जैसी शिकायतें देखने को मिल रही हैं। डॉक्टरों के मुताबिक कुछ मरीज इलाज में देरी या दवाओं का निर्धारित कोर्स पूरा नहीं करने के बाद गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंच रहे हैं।
प्लेटलेट्स कम होने पर बढ़ रही परेशानी
चिकित्सकों के अनुसार वायरल फीवर के कुछ मरीजों में प्लेटलेट्स कम होने की समस्या भी सामने आ रही है। इसके कारण मरीजों को घबराहट और सीने में जकड़न जैसी दिक्कत महसूस हो सकती है।
इसके अलावा डायरिया और निमोनिया के मरीज भी बड़ी संख्या में इमरजेंसी पहुंच रहे हैं। इससे अस्पताल में मरीजों की संख्या के साथ-साथ तीमारदारों की भीड़ भी लगातार बढ़ रही है।
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक पिछले महीने बारिश कम होने के बाद तेज धूप और मौसम में बदलाव का असर स्वास्थ्य पर पड़ा है। इसके चलते वायरल संक्रमण से संबंधित मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
80 बेड भरने के बाद बनाई गई ट्रायज यूनिट
एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में कुल 80 बेड उपलब्ध हैं। मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण जब सभी बेड भर गए तो अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार के पास 12 बेड की ट्रायज यूनिट शुरू की गई।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार इस यूनिट में पहुंचने वाले मरीजों की प्रारंभिक जांच की जाएगी। जिन मरीजों की हालत ज्यादा गंभीर होगी, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर भर्ती कर इलाज दिया जाएगा।
मरीजों की सुविधा के लिए ट्रायज यूनिट के पास ही पर्चा काउंटर की व्यवस्था भी की गई है, ताकि मरीजों और उनके परिजनों को पर्चा बनवाने के लिए इमरजेंसी के अंदर ज्यादा भीड़ का सामना न करना पड़े।
इन्फ्लुएंजा और स्वाइन फ्लू के मरीज भी बढ़े
इमरजेंसी प्रभारी डॉ. मनीष बंसल के अनुसार इन दिनों वायरल फीवर के साथ स्वाइन फ्लू और इन्फ्लुएंजा-ए से जुड़े मरीज भी अस्पताल पहुंच रहे हैं।
एसएन मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में पहले से फ्लू ओपीडी संचालित की जा रही है। अब इमरजेंसी में भी अलग से फ्लू डेस्क बनाया गया है।
फ्लू डेस्क पर आने वाले मरीजों के लक्षणों की प्रारंभिक जांच की जाती है। इसके बाद उनकी स्थिति और लक्षणों के आधार पर उन्हें संबंधित विभाग में भेजा जाता है, जिससे मरीज को सही विशेषज्ञ तक पहुंचाने में देरी न हो।
इलाज में देरी से बढ़ सकती है परेशानी
डॉक्टरों का कहना है कि वायरल फीवर में लक्षण बढ़ने पर समय रहते चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। कुछ मरीज शुरुआत में बुखार और शरीर दर्द को सामान्य समझकर इलाज में देरी कर देते हैं। वहीं कई बार दवाओं का पूरा कोर्स नहीं करने से कमजोरी और थकान लंबे समय तक बनी रह सकती है।
अस्पताल में लगातार बढ़ रही मरीजों की संख्या को देखते हुए ट्रायज यूनिट और फ्लू डेस्क की व्यवस्था से गंभीर मरीजों की पहचान कर उन्हें जल्द उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।








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