तेलंगाना विधानसभा में 6 सितंबर को हुई कथित हिंसा और विवाद को लेकर मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष जी. प्रसाद कुमार के साथ कथित दुर्व्यवहार, बीआरएस विधायकों और पुलिसकर्मियों के बीच हुई झड़प समेत पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
बुधवार, 9 सितंबर को विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान रेवंत रेड्डी ने कहा कि घटनाओं के पीछे जो भी लोग जिम्मेदार पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जांच के दौरान केवल घटना में सीधे शामिल लोगों ही नहीं, बल्कि कथित तौर पर साजिश रचने, सहयोग करने या घटना को अंजाम देने में मदद करने वालों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।
पद और राजनीतिक प्रभाव नहीं आएगा आड़े
मुख्यमंत्री ने कहा कि जरूरत पड़ने पर संबंधित लोगों के खिलाफ उनकी राजनीतिक स्थिति या पद की परवाह किए बिना कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि मामले में परिस्थितियों के अनुसार विभिन्न कानूनी धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए जा सकते हैं।
रेवंत रेड्डी ने यह भी कहा कि यदि जांच में अनुसूचित जाति या जनजाति से जुड़े कानून के तहत कार्रवाई की जरूरत सामने आती है, तो संबंधित प्रावधानों का इस्तेमाल भी किया जाएगा।
‘जमानत से जनता के सवाल खत्म नहीं होंगे’
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष के साथ हुई कथित घटना को हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने अध्यक्ष के प्रति समर्थन जताते हुए उनसे अपने संवैधानिक दायित्वों का मजबूती से निर्वहन करते रहने की अपील की।
रेवंत रेड्डी ने उन लोगों को भी चेतावनी दी जो कानूनी प्रक्रिया के दौरान जमानत लेकर खुद को जनता के सवालों से बचा लेने की उम्मीद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि कानूनी राहत मिलने के बावजूद जनता के बीच उठने वाले सवालों से बचना आसान नहीं होगा।
केसीआर पर लगाया विधायकों को उकसाने का आरोप
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने बीआरएस प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव पर भी निशाना साधा। रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया कि केसीआर ने अपनी पार्टी के विधायकों को दलित नेताओं और विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ जाने के लिए कथित तौर पर उकसाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष एक संवैधानिक पद पर हैं और इस पद की गरिमा बनाए रखना सभी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है।
खरगे से जुड़े विवाद का भी जिक्र
रेवंत रेड्डी ने इस दौरान उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से जुड़े कथित शुद्धिकरण विवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने इस घटना की निंदा करते हुए इसे सामाजिक और राजनीतिक मर्यादाओं से जुड़ा गंभीर विषय बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में संवैधानिक पदों और वरिष्ठ नेताओं के प्रति सम्मान बनाए रखना जरूरी है।
‘अध्यक्ष के साथ बदसलूकी जनता का अपमान’
रेवंत रेड्डी ने विधानसभा अध्यक्ष के साथ कथित दुर्व्यवहार को तेलंगाना की जनता का अपमान करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीआरएस के कुछ विधायकों ने एक दलित संवैधानिक पदाधिकारी के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सामाजिक भेदभाव और कथित मनुवादी सोच के खिलाफ सख्त रुख अपनाएगी। उन्होंने दोहराया कि 6 सितंबर की घटनाओं की जांच के बाद जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे मामले को लेकर तेलंगाना की राजनीति में सियासी तनाव बढ़ गया है और आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्षों के आधार पर विवाद और गहराने की संभावना है।

