राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने लंदन में आयोजित ‘सेलिब्रेशन ऑफ वननेस’ कार्यक्रम में समाज की एकता और संगठन की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब समाज एकजुट और संगठित हो जाएगा, तो कई दूसरी समस्याओं का समाधान अपने आप होने लगेगा। भागवत इन दिनों 17 दिवसीय विदेश यात्रा पर हैं और संघ के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विभिन्न देशों में आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं।
लंदन के कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान मोहन भागवत ने कहा कि समाज को संगठित करने का लक्ष्य आने वाली पीढ़ियों के इंतजार में नहीं छोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को संगठित करने का कार्य जल्द पूरा होना चाहिए। उनके मुताबिक आज RSS को पहले की तुलना में व्यापक स्तर पर स्वीकार किया जा रहा है और संगठन के आलोचक भी उसके काम की उपयोगिता को समझने लगे हैं।
भागवत ने लोगों से उन बातों पर ज्यादा ध्यान देने की अपील की, जो समाज को जोड़ती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी चीजों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, जो लोगों के बीच एकता और आपसी सहयोग को मजबूत करती हैं, न कि उन मुद्दों को जो समाज में विभाजन पैदा करते हैं।
समाज के लिए निस्वार्थ काम करने वाला भी स्वयंसेवक
RSS प्रमुख ने स्वयंसेवक की परिभाषा को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति समाज के हित में ईमानदारी और बिना किसी स्वार्थ के काम कर रहा है, उसे स्वयंसेवक माना जा सकता है, भले ही उसका RSS से प्रत्यक्ष संपर्क न हो।
मोहन भागवत के अनुसार, जरूरी नहीं कि कोई व्यक्ति संघ के साथ नियमित रूप से जुड़ा हो या उसे RSS के बारे में विस्तृत जानकारी हो। अगर वह समाज की भलाई के लिए समर्पित होकर काम कर रहा है, तो उसके प्रयासों को भी इसी भावना से देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज संघ से जुड़े लोग समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। राजनीति समेत कई क्षेत्रों में स्वयंसेवक सक्रिय हैं और लोगों के साथ जुड़कर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए काम कर रहे हैं। भागवत ने यह भी कहा कि जिन क्षेत्रों में जरूरत के बावजूद कोई काम नहीं हो रहा है, वहां संघ से जुड़े लोग अपनी भूमिका निभाने की कोशिश कर रहे हैं।
RSS के शताब्दी वर्ष पर विदेश दौरे पर हैं मोहन भागवत
मोहन भागवत संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के मौके पर तीन देशों के 17 दिवसीय दौरे पर हैं। उनकी यात्रा का पहला चरण अमेरिका में रहा, इसके बाद उन्होंने कनाडा का दौरा किया और फिलहाल ब्रिटेन में हैं। यह संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान उनका प्रमुख अंतरराष्ट्रीय दौरा है।
ब्रिटेन पहुंचने से पहले भागवत ने अमेरिका के न्यूयॉर्क में आयोजित यूनिवर्सल वननेस सम्मेलन को संबोधित किया था। इसके बाद वह कनाडा के टोरंटो पहुंचे, जहां उन्होंने हिंदू विश्व बंधु सम्मेलन में हिस्सा लिया।
अब उनकी विदेश यात्रा का अंतिम पड़ाव लंदन है। यहां उन्होंने ‘सेलिब्रेशन ऑफ वननेस’ कार्यक्रम में हिस्सा लेकर समाज में एकता, संगठन और सेवा की भावना को मजबूत करने पर जोर दिया।







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