Saturday, September 05, 2026

उत्तर प्रदेश

सोनभद्र में कृष्ण जन्मोत्सव पर दिखा भव्य नजारा, रेणुकूट मंदिर में देर रात तक जुटी भक्तों की भीड़

सोनभद्र में कृष्ण जन्मोत्सव पर दिखा भव्य नजारा, रेणुकूट मंदिर में देर रात तक जुटी भक्तों की भीड़

सोनभद्र में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व शुक्रवार को पूरे उत्साह और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। शुक्रवार और शनिवार की मध्यरात्रि 12 बजे जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, जिलेभर के मंदिरों में घंटी, घड़ियाल और शंख की आवाज गूंजने लगी। श्रद्धालुओं ने ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ और ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों से माहौल भक्तिमय कर दिया।

भगवान के बाल स्वरूप के दर्शन के लिए मंदिरों में देर रात तक भक्तों की भीड़ जुटी रही। श्रद्धालुओं ने कान्हा के दर्शन कर परिवार में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। जन्माष्टमी को लेकर शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक मंदिरों को रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से सजाया गया था।

रेणुकूट के राधा-कृष्ण मंदिर में उमड़ा भक्तों का सैलाब

रेणुकूट स्थित राधा-कृष्ण मंदिर में जन्माष्टमी के अवसर पर विशेष सजावट की गई थी। यहां दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर में एक लाख से अधिक भक्तों के पहुंचने की जानकारी सामने आई है।

रात तक मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। भगवान कृष्ण के जन्म के समय मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा और भक्तों ने उत्साह के साथ जन्मोत्सव मनाया।

बांके बिहारी मंदिर में सुबह से भजन-कीर्तन

राबर्ट्सगंज के रामलीला मैदान परिसर स्थित बांके बिहारी मंदिर में भी जन्माष्टमी को लेकर विशेष आयोजन किया गया। मंदिर को आकर्षक तरीके से सजाया गया था और सुबह से ही भजन-कीर्तन का सिलसिला शुरू हो गया था।

इसके अलावा राम जानकी मंदिर, कोतवाली वाले हनुमान मंदिर, संकट मोचन मंदिर और रौप स्थित पंचमुखी मंदिर में भी विशेष सजावट की गई। श्रद्धालुओं ने अलग-अलग मंदिरों में पहुंचकर पूजा-अर्चना की।

कई लोगों ने अपने घरों में भी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की झांकियां सजाईं। बच्चों ने कृष्ण और राधा का रूप धारण कर लोगों का मन मोह लिया।

आधी रात कान्हा के जन्म पर जमकर हुई आतिशबाजी

शाम करीब सात बजे से ही मंदिरों और पूजा पंडालों में भजन-कीर्तन शुरू हो गया था। जैसे ही रात के 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का समय हुआ, भक्तों में खुशी की लहर दौड़ गई।

कई स्थानों पर आतिशबाजी कर जन्मोत्सव की खुशियां मनाई गईं। मंदिरों में बधाई गीत गूंजने लगे और श्रद्धालुओं ने भगवान के जन्म की खुशी में जमकर जयकारे लगाए।

घंटियों, शंख और घड़ियाल की आवाज के बीच पूरा वातावरण कृष्ण भक्ति में डूबा नजर आया।

पंचामृत से हुआ लड्डू गोपाल का अभिषेक

भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद मंदिरों में लड्डू गोपाल की प्रतिमाओं का विधि-विधान से अभिषेक किया गया। दूध, दही, शहद और गंगाजल समेत विभिन्न पूजन सामग्री से भगवान का अभिषेक किया गया।

इसके बाद लड्डू गोपाल का विशेष शृंगार किया गया और आरती उतारी गई। श्रद्धालुओं ने बधाई गीत गाते हुए भगवान के बाल स्वरूप के दर्शन किए।

कई पूजा पंडालों में आकर्षक धार्मिक झांकियां भी सजाई गई थीं। बच्चों ने राधा-कृष्ण का रूप धारण कर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। देर रात तक भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम चलते रहे।

प्रसाद वितरण के साथ हुआ जन्मोत्सव का समापन

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के बाद मंदिरों और पंडालों में श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया गया। बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया और भगवान कृष्ण से परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की।

सोनभद्र में जन्माष्टमी के दौरान शहर से लेकर गांव तक धार्मिक उत्सव का माहौल बना रहा। मंदिरों में उमड़ी भीड़, कृष्ण भक्ति के गीत और जयकारों ने पूरे जिले को भक्तिमय कर दिया।

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