कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने पार्टी की पूर्व प्रवक्ता विजेता दहिया की संभावित वापसी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दहिया की वापसी के विकल्प पर आगे विचार किया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि आंदोलन के दौरान जो घटना हुई थी, वह संवेदनशील समय में हुई थी और उसकी टाइमिंग उचित नहीं थी।
अभिजीत दीपके के मुताबिक, विजेता दहिया एक अच्छी इंसान हैं, लेकिन जिस वक्त वह विवादित स्थिति में नजर आईं, वह सही समय नहीं था। उन्होंने कहा कि उस घटना को उस तरीके से नहीं होना चाहिए था।
क्यों हटाई गई थीं विजेता दहिया?
दरअसल, आंदोलन के दौरान विजेता दहिया का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। इसमें उन्हें एक फास्ट-फूड आउटलेट पर देखा गया था। उसी दौरान नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की खबरें सामने आ रही थीं।
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर दहिया की जमकर आलोचना हुई। विवाद बढ़ने के बाद CJP ने उन्हें पार्टी के प्रवक्ता पद से हटा दिया था।
हालांकि, विजेता दहिया ने बाद में पूरे मामले पर अपनी सफाई दी थी। उनका कहना था कि कुछ लोगों ने उन्हें रोकने की कोशिश की और उनके साथ धक्का-मुक्की भी हुई। उन्होंने दावा किया था कि विवाद की शुरुआत एक धार्मिक व्यक्ति को संबोधित करने के तरीके को लेकर हुई थी। इसके बाद मामला उनके बर्गर खाने तक पहुंच गया और आंदोलन के दौरान फास्ट-फूड खाने को लेकर सवाल उठाए जाने लगे।
दहिया की वापसी पर क्या बोले अभिजीत दीपके?
विजेता दहिया की संभावित वापसी के सवाल पर अभिजीत दीपके ने कहा कि पार्टी इस मुद्दे पर विचार करेगी। उन्होंने माना कि उस दिन की घटना असंवेदनशील दिखाई दी थी, लेकिन इसके बावजूद वह दहिया को एक अच्छा व्यक्ति मानते हैं।
उनके मुताबिक, समस्या मुख्य रूप से घटना के समय और परिस्थितियों को लेकर थी। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में दहिया को पार्टी में दोबारा जिम्मेदारी देने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है।
सोनम वांगचुक को लेकर भी खुलकर बोले
अभिजीत दीपके ने आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल सोनम वांगचुक के साथ अपने संबंधों और आंदोलन के दौरान उनकी भूमिका पर भी बात की।
उन्होंने उन आरोपों को खारिज किया, जिनमें कहा जाता रहा कि सोनम वांगचुक को कथित तौर पर उनके प्रभाव में लाकर अनशन पर बैठाया गया था। दीपके ने कहा कि वांगचुक एक वैज्ञानिक हैं और काफी समझदार व्यक्ति हैं। उनके मुताबिक, वांगचुक ने अनशन का फैसला खुद लिया था और उन्हें किसी तरह से नियंत्रित या प्रभावित करना आसान नहीं था।
दीपके ने बताया कि वह लगातार सोनम वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील करते रहे थे। हालांकि, वांगचुक का मानना था कि अगर वह उस समय अनशन खत्म करते हैं तो आंदोलन पर इसका असर पड़ सकता है।
‘उनके बिना आंदोलन इतना बड़ा नहीं होता’
CJP के फाउंडर ने सोनम वांगचुक की भूमिका की तारीफ करते हुए कहा कि वह आंदोलन का प्रमुख चेहरा बन चुके थे। उनके मुताबिक, वांगचुक के जुड़ने और अनशन करने से आंदोलन को देशभर में पहचान मिली।
दीपके ने कहा कि वांगचुक ने अपनी सेहत और जान की परवाह किए बिना लोगों के बीच मुद्दे को लेकर जागरूकता पैदा करने का काम किया। उनका मानना है कि आंदोलन के विस्तार में वांगचुक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही।
उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन खत्म होने के बाद भी दोनों के बीच बातचीत हुई और समय के साथ आंदोलन अब केवल CJP या सोनम वांगचुक तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका दायरा काफी व्यापक हो चुका है।
‘सोनम सर को उठाकर ले गए’
आंदोलन के दौरान सोनम वांगचुक को हिरासत में लिए जाने के सवाल पर अभिजीत दीपके ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जब वांगचुक को वहां से ले जाया गया, तब उन्हें उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई।
दीपके ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि वांगचुक को एक तरह से अलग रख दिया गया था और उन्हें उनसे संपर्क करने तक नहीं दिया गया। उन्होंने इस पूरी घटना को बेहद गंभीर बताते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की।

