लद्दाख के लिए केंद्र सरकार जल्द ही विशेष संवैधानिक प्रावधानों का ऐलान कर सकती है। केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने लेह में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि लद्दाख के लिए संविधान के अनुच्छेद 371 के तहत विशेष व्यवस्था तैयार करने पर काम चल रहा है।
इस प्रस्ताव का उद्देश्य लद्दाख की स्थानीय पहचान, जनजातीय परंपराओं, जमीन से जुड़े अधिकारों और स्थानीय लोगों के रोजगार के हितों को संरक्षण देना है। हालांकि, इस व्यवस्था का अंतिम स्वरूप और इसे लागू करने की प्रक्रिया केंद्र सरकार के फैसले पर निर्भर करेगी।
लेह के कार्यक्रम में रिजिजू ने किया बड़ा संकेत
रिजिजू ने शुक्रवार, 28 अगस्त को लेह के शे इलाके में स्थित ड्रुक पद्मा करपो स्कूल के सिल्वर जुबली समारोह में हिस्सा लिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लद्दाख से विशेष जुड़ाव रहा है और केंद्र सरकार इस क्षेत्र के विकास तथा स्थानीय हितों को ध्यान में रखकर लगातार कदम उठा रही है।
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, प्रधानमंत्री के नेतृत्व में लद्दाख में बीते वर्षों में सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का प्रयास है कि विकास के साथ-साथ क्षेत्र की विशिष्ट पहचान और स्थानीय लोगों के हित भी सुरक्षित रहें।
गृह मंत्रालय कर रहा विशेष प्रावधानों पर काम
रिजिजू ने बताया कि गृह मंत्रालय लद्दाख के लिए विशेष संवैधानिक व्यवस्था तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था में स्थानीय लोगों को प्रशासन में ज्यादा भागीदारी देने पर जोर दिया जा सकता है।
इसके तहत केंद्र शासित प्रदेश के स्तर पर एक निर्वाचित संस्था और विधान परिषद जैसी व्यवस्था का प्रस्ताव बताया गया है। इन संस्थाओं को प्रशासनिक, विधायी और वित्तीय मामलों में पर्याप्त अधिकार देने की बात कही जा रही है।
हालांकि, इस प्रस्ताव से लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने की संभावना फिलहाल स्पष्ट नहीं है। राज्य का दर्जा लद्दाख की प्रमुख मांगों में शामिल रहा है।
स्थानीय सरकार को मिल सकती है ज्यादा ताकत
प्रस्तावित ढांचे में स्थानीय राजनीतिक नेतृत्व को अधिक अधिकार देने की बात सामने आई है। इसमें प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही निर्वाचित राजनीतिक नेतृत्व के प्रति तय करने की व्यवस्था शामिल हो सकती है।
इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर लिए जाने वाले फैसलों में क्षेत्र के निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका को मजबूत करना बताया जा रहा है।
सातों जिलों में LAHDC के विस्तार की योजना
लद्दाख में स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषदों की भूमिका भी बढ़ाने की योजना बताई गई है। अभी लेह और करगिल में काम कर रहीं लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषदों यानी LAHDC के दायरे को नए जिलों तक बढ़ाने का प्रस्ताव है।
लद्दाख में हाल ही में कई नए जिलों का गठन किया गया है। इनमें शाम, नुब्रा, चांगथांग, जंस्कार और द्रास जैसे क्षेत्र शामिल हैं। प्रस्तावित व्यवस्था में इन क्षेत्रों में भी स्थानीय परिषदों को मजबूत करने की बात कही गई है।
इन परिषदों को केवल प्रशासनिक या वैधानिक अधिकारों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें ज्यादा मजबूत संवैधानिक आधार देने पर भी विचार किया जा रहा है।
जल्द लागू हो सकते हैं नए प्रावधान
रिजिजू ने उम्मीद जताई कि लद्दाख के लिए प्रस्तावित विशेष प्रावधानों को जल्द अंतिम रूप दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्र के लोगों को स्थानीय प्रशासन और विकास से जुड़े मामलों में ज्यादा अधिकार मिलेंगे।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंबे समय से लद्दाख के लोगों के बीच जाकर उनसे संवाद करना चाहते हैं। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री का लद्दाख दौरा भी आने वाले समय में हो सकता है।
पिछले एक दशक में तेजी से बदला लद्दाख
रिजिजू ने कहा कि पिछले करीब एक दशक में लद्दाख में बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में काफी बदलाव आया है। सड़क नेटवर्क में सुधार का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पहले जिन रास्तों को तय करने में कई दिन लग जाते थे, अब कई स्थानों तक कुछ घंटों में पहुंचना संभव हुआ है।
उनके मुताबिक, नए जिलों के गठन से प्रशासन को लोगों के और करीब ले जाने में मदद मिलेगी और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को सरकारी सेवाओं तक बेहतर पहुंच मिल सकेगी।
लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की मांग हुई पूरी
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की मांग लंबे समय से उठती रही थी, जिसे पूरा किया जा चुका है। अब प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में आगे के कदम उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि लद्दाख में हाई कोर्ट की एक बेंच स्थापित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इससे कानूनी मामलों के लिए लोगों को दूसरे क्षेत्रों की यात्रा करने की जरूरत कम हो सकती है।
अल्पसंख्यकों को समान अवसर देने पर जोर
रिजिजू ने अपने संबोधन में अल्पसंख्यक समुदायों के विकास और समान अवसरों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार देश के सभी अल्पसंख्यक समुदायों के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों का उद्देश्य सभी वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराना है।







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