तिरुवनंतपुरम: पलक्कड़ रेलवे डिवीजन से जुड़े केंद्र सरकार के हालिया फैसले को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि इस फैसले का केरल पर वित्तीय और संचालन संबंधी असर पड़ सकता है। उन्होंने इस मुद्दे पर राज्य के UDF सांसदों के साथ चर्चा कर केंद्र के सामने विरोध दर्ज कराने का निर्णय लिया है।
शनिवार देर रात केरल के UDF सांसदों की ऑनलाइन बैठक हुई, जिसमें पलक्कड़ रेलवे डिवीजन के एक बड़े हिस्से को अलग करने से जुड़े फैसले पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के बाद सांसदों ने केंद्र के निर्णय का विरोध करने पर सहमति जताई।
थरूर ने केंद्र पर लगाया बिना सलाह फैसला लेने का आरोप
शशि थरूर ने रविवार को सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने प्रभावित राज्य सरकार और सांसदों से पर्याप्त बातचीत किए बिना इतना महत्वपूर्ण फैसला लिया है।
उनके मुताबिक, इस निर्णय से केरल की रेलवे व्यवस्था और राज्य की वित्तीय स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। उन्होंने केंद्र के कदम को स्वीकार करने योग्य नहीं बताया और कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण फैसले से पहले संबंधित पक्षों से चर्चा होनी चाहिए थी।
फैसले को रोकने की मांग
UDF सांसदों ने मांग की है कि पलक्कड़ रेलवे डिवीजन से संबंधित फैसले को फिलहाल रोक दिया जाए। उनका कहना है कि जब तक पूरे मामले पर विस्तृत चर्चा नहीं होती, तब तक इस निर्णय को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।
थरूर ने बताया कि पलक्कड़ रेलवे डिवीजन और प्रभावित क्षेत्रों से जुड़े सांसद इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन और धरना भी करेंगे। इसके जरिए केंद्र सरकार का ध्यान इस फैसले के संभावित प्रभावों की ओर आकर्षित करने की कोशिश की जाएगी।
रेल मंत्री को भेजा जाएगा संयुक्त पत्र
थरूर के अनुसार, उन्होंने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को भेजे जाने वाले पत्र का मसौदा तैयार किया है। इस पत्र पर UDF के सभी सांसदों की सहमति के बाद हस्ताक्षर कर इसे रेल मंत्री के पास भेजा जाएगा।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि केरल को इस मामले में अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। उनका जोर इस बात पर है कि पूरे मुद्दे पर पारदर्शी तरीके से सुनवाई हो, सभी पक्षों की दलीलें सुनी जाएं और उसके बाद उचित निर्णय लिया जाए।
राजनीतिक टकराव बढ़ने के संकेत
पलक्कड़ रेलवे डिवीजन से जुड़े इस फैसले ने केंद्र और केरल के बीच राजनीतिक मतभेद को और बढ़ा दिया है। UDF सांसदों के एकजुट होकर विरोध की तैयारी करने से आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और राज्य की राजनीति में भी जोर पकड़ सकता है।
अब सबकी नजर केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय की प्रतिक्रिया पर है कि क्या फैसले की समीक्षा की जाएगी या फिर इसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जाएगा।







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