पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए नए रक्षा समझौते को लेकर भारत सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और बदलते सुरक्षा समीकरणों के बीच भारत इस समझौते से जुड़े घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहा है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से जब इस समझौते के संभावित प्रभावों को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि भारत पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। सरकार इस बात का आकलन कर रही है कि इस रक्षा सहयोग का भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर क्या असर पड़ सकता है।
भारत की प्राथमिकता राष्ट्रीय सुरक्षा
विदेश मंत्रालय की ओर से फिलहाल इस समझौते पर कोई सीधी आपत्ति जाहिर नहीं की गई है। भारत का रुख फिलहाल घटनाक्रम को समझने और उसके संभावित रणनीतिक प्रभावों का मूल्यांकन करने पर केंद्रित है।
सरकार का मानना है कि क्षेत्र में होने वाले किसी भी बड़े सुरक्षा समझौते का असर व्यापक स्तर पर पड़ सकता है। ऐसे में भारत संबंधित देशों के बीच बढ़ते सैन्य और रणनीतिक सहयोग पर लगातार नजर रख रहा है।
पश्चिम एशिया में बदल रहा सुरक्षा समीकरण
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच रक्षा सहयोग ऐसे समय में सामने आया है, जब पश्चिम एशिया पहले से ही तनावपूर्ण दौर से गुजर रहा है। क्षेत्र में अलग-अलग देशों के बीच सुरक्षा साझेदारी मजबूत होने से रणनीतिक समीकरणों में बदलाव की संभावना को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
भारत के लिए भी इस समझौते की अहमियत इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि इसमें पाकिस्तान के साथ सऊदी अरब और तुर्किये जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रीय देश शामिल हैं।
जरूरत पड़ी तो भारत लेगा जरूरी फैसला
विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया है कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक हितों से जुड़े मामलों को गंभीरता से लेता है। यदि आने वाले समय में इस समझौते से भारत की सुरक्षा या क्षेत्रीय स्थिरता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव सामने आता है, तो स्थिति के अनुरूप आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।
फिलहाल भारत इस रक्षा समझौते की प्रकृति, इसके दायरे और क्षेत्रीय प्रभावों का आकलन कर रहा है। आने वाले दिनों में इस समझौते के असर को लेकर भारत का रुख और अधिक स्पष्ट हो सकता है।








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