नई दिल्ली: युवा मतदाताओं के पंजीकरण और चुनावी कामकाज में इस्तेमाल होने वाले ECINET को लेकर उठ रहे सवालों के बीच चुनाव आयोग ने गुरुवार को कई बिंदुओं पर अपना पक्ष स्पष्ट किया। आयोग ने बताया कि 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं के लिए मतदाता के रूप में पंजीकरण की व्यवस्था साल में चार अलग-अलग qualifying dates के आधार पर की जाती है।
चुनाव आयोग के मुताबिक, 2021 में जनप्रतिनिधित्व कानून, 1950 की धारा 14 में बदलाव के बाद हर साल 1 जनवरी, 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर को qualifying date माना जाता है। यानी कोई युवा इन तारीखों में 18 साल की उम्र पूरी करता है तो वह मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकता है। उसे अगली मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण का इंतजार करना जरूरी नहीं है।
SSR और SIR को लेकर आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग ने Special Summary Revision यानी SSR और Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। आयोग के अनुसार दोनों प्रक्रियाएं जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत संचालित होती हैं और कानून में यह अनिवार्यता नहीं है कि दोनों प्रक्रियाओं को एक साथ ही कराया जाए।
यानी जरूरत और परिस्थितियों के अनुसार SSR और SIR अलग-अलग समय पर कराए जा सकते हैं।
मतदाता सूची में नाम जोड़ने का अधिकार किसके पास?
आयोग के अनुसार ECINET के इस्तेमाल के बावजूद मतदाता सूची से जुड़े कानूनी अधिकारों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। Electoral Registration Officer यानी ERO कानून के मुताबिक मतदाता सूची में नाम शामिल करने या हटाने से जुड़े फैसले लेता है।
हालांकि, अगर किसी व्यक्ति का नाम ERO के आदेश से मतदाता सूची से हटाया जाता है तो उसी आदेश के आधार पर ERO अपने स्तर पर उस नाम को वापस शामिल नहीं कर सकता। नाम दोबारा दर्ज कराने के लिए संबंधित कानूनी प्रक्रिया अपनानी होती है।
ऐसे मामले में मतदाता Form 6 या लागू स्थिति के अनुसार Form 8 के जरिए आवेदन कर सकता है। इसके अलावा ERO के आदेश के खिलाफ संबंधित उच्च अधिकारी के समक्ष अपील का रास्ता भी उपलब्ध है।
क्या नाम जोड़ने का पूरा सिस्टम दिल्ली से चलता है?
चुनाव आयोग ने इस धारणा को भी खारिज किया कि मतदाता सूची को पूरी तरह केंद्रीय स्तर पर नियंत्रित किया जा रहा है।
आयोग के अनुसार, यदि किसी मतदाता का नाम सूची से हटाया गया है और वह संबंधित आदेश के खिलाफ अपील करता है, तो कानून में निर्धारित अपीलीय अधिकारी मामले की जांच कर निर्णय ले सकता है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि मतदाता का नाम दोबारा केवल दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालय से ही जोड़ा जा सकता है।
आयोग ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची से संबंधित वैधानिक अधिकार संबंधित चुनाव अधिकारियों के पास ही रहते हैं।
ECINET आखिर है क्या?
ECINET को लेकर भी चुनाव आयोग ने अपनी स्थिति सामने रखी है। आयोग के अनुसार यह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसका इस्तेमाल चुनाव से जुड़े अधिकारी अपने वैधानिक और प्रशासनिक कार्यों के लिए करते हैं।
BLO, AERO, ERO, DEO और CEO जैसे अलग-अलग स्तर के अधिकारी अपनी निर्धारित भूमिका और अलग-अलग लॉगिन पहचान के जरिए सिस्टम पर काम करते हैं।
चुनाव आयोग ने जनवरी 2026 में ECINET को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के तौर पर लॉन्च किया था। आयोग के अनुसार इसमें 40 से अधिक पुराने ऐप और पोर्टल की सेवाओं को एक प्लेटफॉर्म पर लाया गया है।
ECINET की सुरक्षा को लेकर आयोग का दावा
आयोग ने ECINET की साइबर सुरक्षा पर भी जानकारी दी। उसका कहना है कि सिस्टम में प्रत्येक अधिकारी को उसकी भूमिका के मुताबिक अधिकार दिए जाते हैं और वैधानिक काम करने के लिए संबंधित अधिकारी की अपनी पहचान का इस्तेमाल होता है।
आयोग के अनुसार किसी अन्य अधिकारी को किसी अधिकृत अधिकारी की जगह उसके नाम से वैधानिक कार्रवाई करने की अनुमति नहीं है। सिस्टम की सुरक्षा और साइबर सिक्योरिटी की जिम्मेदारी चुनाव आयोग के पास है।
आयोग ने यह भी दावा किया कि विधानसभा चुनावों की मतगणना वाले दिन ECINET को निशाना बनाकर करीब 68 लाख साइबर अटेम्प्ट किए गए थे। आयोग का कहना है कि इन प्रयासों के बावजूद सिस्टम की सुरक्षा बनाए रखी गई।
ECINET पर कितने काम हो रहे हैं?
चुनाव आयोग के जनवरी 2026 के आधिकारिक विवरण के अनुसार, ECINET के बीटा संस्करण का इस्तेमाल 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव और SIR के दौरान किया गया था। आयोग ने बताया था कि लॉन्च से पहले सिस्टम पर 10 करोड़ से अधिक पंजीकरण फॉर्म प्रोसेस किए जा चुके थे और 11 लाख से ज्यादा BLO इससे जुड़े थे।
ECINET के जरिए मतदाता पंजीकरण, आवेदन की स्थिति जानना, मतदाता सूची से संबंधित सेवाएं, शिकायत निवारण और चुनाव संबंधी अन्य जानकारियां उपलब्ध कराई जाती हैं।
युवा मतदाताओं के लिए क्या है व्यवस्था?
चुनाव आयोग ने दोहराया कि 18 साल की उम्र पूरी करने वाले युवाओं को साल में चार qualifying dates के आधार पर मतदाता के रूप में पंजीकरण का अवसर मिलता है।
आयोग के आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, qualifying dates की व्यवस्था का उद्देश्य पात्र नागरिकों को 18 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद मतदाता सूची में शामिल होने के अधिक अवसर देना है।
इस तरह आयोग ने युवा वोटरों के पंजीकरण, मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने की प्रक्रिया और ECINET की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों पर अपने अधिकार क्षेत्र और मौजूदा कानूनी प्रक्रिया को स्पष्ट किया है।






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