Thursday, September 24, 2026

राष्ट्रीय

बंगाल उपचुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी, TMC का नाम-चिह्न बदला और कांग्रेस उम्मीदवार गिरफ्तार

बंगाल उपचुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी, TMC का नाम-चिह्न बदला और कांग्रेस उम्मीदवार गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव से पहले राज्य की राजनीति में घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं। एक तरफ तृणमूल कांग्रेस के भीतर गुटों की लड़ाई के बीच चुनाव आयोग ने पार्टी के पुराने नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाकर दोनों धड़ों को अलग-अलग पहचान दी है। दूसरी ओर नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी ने चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया है।

दोनों सीटों पर होने वाला उपचुनाव ऐसे समय हो रहा है, जब राज्य की राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मुकाबला नए समीकरणों के साथ सामने आ रहा है।

नंदीग्राम में बदला चुनावी समीकरण

नंदीग्राम में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले धड़े की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने चुनावी मैदान से हटने का फैसला किया। इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की।

ममता बनर्जी के मुताबिक, कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने का उद्देश्य विपक्षी दलों के बीच समन्वय को मजबूत करना है। इसके बाद नंदीग्राम का मुकाबला और अधिक चर्चा में आ गया।

समर्थन के कुछ घंटे बाद मिलन प्रधान गिरफ्तार

ममता बनर्जी द्वारा समर्थन का ऐलान किए जाने के कुछ घंटे बाद कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, उनके खिलाफ पुराने मामलों में लंबित गैर-जमानती वारंट थे और इन्हीं के आधार पर कार्रवाई की गई।

मामले का संबंध 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों से बताया गया है। बाद में हल्दिया की अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें 3 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में रखा गया है।

कांग्रेस और ममता बनर्जी के खेमे ने गिरफ्तारी के समय को लेकर सवाल उठाए और इसे राजनीतिक कार्रवाई बताया। वहीं पुलिस की ओर से कहा गया कि कार्रवाई लंबित वारंट और पुराने मामलों के आधार पर हुई है। दोनों पक्षों के इन दावों को उनके राजनीतिक और प्रशासनिक बयानों के रूप में देखा जाना चाहिए।

TMC के नाम और चुनाव चिह्न पर विवाद

उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों के बीच पार्टी की पहचान को लेकर विवाद भी सामने आया। चुनाव आयोग ने फिलहाल पुराने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नाम और पारंपरिक फूल और घास वाले चुनाव चिह्न को फ्रीज कर दिया है।

ममता बनर्जी के धड़े को ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नाम और फुटबॉल खिलाड़ी का चुनाव चिह्न दिया गया है। वहीं दूसरे धड़े को डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस नाम और लिफाफा चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है।

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

रेजीनगर में भी बदला घटनाक्रम

मुर्शिदाबाद की रेजीनगर सीट पर भी ममता बनर्जी के धड़े से जुड़े उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी के फैसले ने चुनावी समीकरण बदल दिए। उन्होंने पहले चुनाव से हटने की घोषणा की थी, लेकिन बाद में ममता बनर्जी से बातचीत के बाद अपना फैसला बदलते हुए चुनाव लड़ने का निर्णय लिया।

इस घटनाक्रम के बीच रेजीनगर से जुड़े एक अन्य उम्मीदवार सैफुल इस्लाम की गिरफ्तारी भी सामने आई। पुलिस के मुताबिक, यह कार्रवाई 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान दो समूहों के बीच हुई झड़प से जुड़े पुराने मामले में की गई।

दोनों सीटों पर कई दल मैदान में

नंदीग्राम में चुनावी मुकाबले में कांग्रेस, बीजेपी और TMC के अलग-अलग धड़े मौजूद हैं। बीजेपी ने हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस की ओर से मिलन प्रधान मैदान में हैं।

रेजीनगर में भी कई दल और उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। यहां TMC के दोनों धड़ों के अलावा कांग्रेस, वाम दल और बीजेपी सहित अन्य राजनीतिक दलों के उम्मीदवार मैदान में हैं।

अल्पसंख्यक मतदाताओं पर भी नजर

रेजीनगर में बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक मतदाता हैं। यही वजह है कि इस सीट पर अलग-अलग दलों की रणनीति में इन मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

उपचुनाव के नतीजों से यह जरूर पता चलेगा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में मतदाताओं ने किस उम्मीदवार और दल को समर्थन दिया। हालांकि मतदान से पहले किसी दल के समर्थन आधार या अंतिम नतीजे को लेकर निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

बीजेपी के लिए भी अहम चुनाव

पश्चिम बंगाल की राजनीति में बीजेपी भी इन दोनों सीटों पर चुनाव लड़ रही है। नंदीग्राम में पार्टी ने हसीरानी रथ को मैदान में उतारा है, जबकि रेजीनगर में पार्टी का उम्मीदवार भी चुनावी मुकाबले में है।

इन उपचुनावों में अलग-अलग दलों के प्रदर्शन से राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और विधानसभा चुनाव के बाद बने समीकरणों की तस्वीर सामने आएगी। हालांकि उपचुनाव के नतीजों को पूरे राज्य के मतदाताओं की राय का सीधा प्रतिनिधि मानना उचित नहीं होगा।

6 अक्टूबर को मतदान

नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होना है। इसके बाद 9 अक्टूबर को मतगणना होगी और दोनों सीटों के परिणाम सामने आएंगे।

फिलहाल उम्मीदवारों की स्थिति, TMC के नाम-चिह्न का विवाद, मिलन प्रधान की गिरफ्तारी और रेजीनगर में हुए घटनाक्रम ने इन दोनों उपचुनावों को पश्चिम बंगाल की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बना दिया है।

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