जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से जुड़े बीपीएड कॉलेजों में इस बार प्रवेश को लेकर अभ्यर्थियों की कम भागीदारी सामने आई है। कुल 585 सीटों के लिए आयोजित प्रवेश प्रक्रिया में पहली काउंसलिंग के बाद सिर्फ 134 अभ्यर्थियों ने प्रवेश की प्रक्रिया पूरी की, जबकि 451 सीटों पर अब भी दाखिला नहीं हो सका है।
विश्वविद्यालय प्रशासन अब रिक्त सीटों को भरने के लिए आगे की प्रक्रिया तय करने की तैयारी में जुटा है। इसके लिए बीपीएड प्रवेश समिति की बैठक प्रस्तावित है। समिति के निर्णय के बाद ही आगे की काउंसलिंग या प्रवेश से संबंधित कदम उठाए जाएंगे।
275 अभ्यर्थियों ने किया था आवेदन
विश्वविद्यालय से संबद्ध बीपीएड महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए कुल 275 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था। इनमें से अभ्यर्थियों की दक्षता परीक्षा 11 और 12 अगस्त को एकलव्य स्टेडियम परिसर में कराई गई थी। परीक्षा पूरी होने के बाद प्रवेश के अगले चरण के रूप में काउंसलिंग आयोजित की गई।
काउंसलिंग के दौरान केवल 134 अभ्यर्थी ही शामिल हुए। इस तरह आवेदन करने वाले करीब आधे उम्मीदवार ही प्रवेश प्रक्रिया के अगले चरण तक पहुंच सके। वहीं 141 अभ्यर्थियों ने काउंसलिंग में हिस्सा नहीं लिया।
दो दिन की प्रक्रिया एक दिन में हुई पूरी
अभ्यर्थियों की संख्या कम होने के कारण काउंसलिंग के लिए निर्धारित दो दिनों की प्रक्रिया पहले ही दिन लगभग पूरी हो गई। दूसरे दिन मुख्य रूप से जरूरी औपचारिकताएं पूरी की गईं। कम संख्या में प्रवेश होने का सीधा असर खाली सीटों पर पड़ा और पहली काउंसलिंग के बाद 451 सीटें रिक्त रह गईं।
आठ कॉलेजों में संचालित हो रहा बीपीएड पाठ्यक्रम
विश्वविद्यालय से संबद्ध जौनपुर और गाजीपुर जिलों में कुल आठ बीपीएड महाविद्यालय संचालित हैं। इनमें सात कॉलेज गाजीपुर में, जबकि एक कॉलेज जौनपुर में है। इन सभी संस्थानों की कुल 585 सीटों पर प्रवेश होना है।
अभ्यर्थियों की कम संख्या के कारण कॉलेज संचालकों के सामने भी परेशानी खड़ी हो गई है। उनका कहना है कि पर्याप्त संख्या में विद्यार्थियों का प्रवेश नहीं होने से संस्थानों की आय प्रभावित होती है और हर साल आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता है।
समिति की बैठक के बाद तय होगा अगला कदम
बीपीएड प्रवेश समिति के समन्वयक डॉ. शेखर सिंह के अनुसार, खाली सीटों को भरने के संबंध में समिति जल्द बैठक करेगी। फिलहाल परीक्षा नियंत्रक कार्यालय से संबंधित पत्र जारी होने की प्रतीक्षा की जा रही है। इसके बाद रिक्त सीटों के लिए आगे की प्रवेश प्रक्रिया पर फैसला लिया जाएगा।
विश्वविद्यालय के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती 451 खाली सीटों को भरने की है। समिति किस तरह इन सीटों के लिए दोबारा अवसर देती है या प्रवेश प्रक्रिया में क्या बदलाव करती है, इसका निर्णय आगामी बैठक में होने की उम्मीद है।








Visit Today : 41
Total Visit : 279475
Hits Today : 265
Total Hits : 711500
Who's Online : 3