

कानपुर। ज्योतिष विद्या एक विज्ञान है। ज्योतिष में आंकड़ों का संकलन करते हुए विधिवत शोध करेंगे तो उससे आम जनमानस को बहुत लाभ होगा। आंकड़ों के शोध से प्राचीन पुस्तकों को ठीक तरीके से समझा जा सकता है। ज्योतिष विद्यार्थियों को सही ज्ञान मिलना बहुत जरूरी है। यह बात काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी जी ने कही। उन्होंने कहा कि बीएचयू और आईकास मिलकर कुछ एमओयू कर सकते हैं, जिससे ज्योतिष का विकास हो। ध्येय यह है कि असली ज्ञान बाहर आना चाहिए। विज्ञान सभी का होता है, पूरे विश्व का कल्याण होगा। श्री चतुर्वेदी ने कहा कि जिस प्रकार मेडिकल साइंस के जर्नल्स में लिखा होता है कि किस उपचार से कितना प्रतिशत लाभ होगा, उसी प्रकार ज्योतिष के सूत्रों को अप्लाई करके उसके फल का आकलन करना जरूरी है।
अयोध्या से आए संत स्वामी मिथिलेश नंदिनी शरण महाराज ने कहा कि ज्योतिष वेद-चक्षु है। चक्षु का अर्थ है नयन। नेत्र यानी नयन है और नयन का अर्थ है आगे ले चलने वाला। हम लोगों को जिधर जाना होता है उसके लिए चरण की आवश्यकता होती है, लेकिन नयन चलने की दिशा का मार्गदर्शन करता है। उन्होंने ने कहा कि जो लोग रोज-रोज ज्योतिष की रीलें देखते रहते हैं, छोटी-छोटी बातों को लेकर ज्योतिषीय जानकारी नेट पर खोजते हैं, वे सावधान हो जाएं। उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि उनकी यह प्रवृत्ति उन्हें मनोरोगी बना देगी।
स्वामी जी ने कहा कि ज्योतिष बहुत ही गूढ़ विद्या है, ज्योतिष आध्यात्मिक है। ज्योतिष सिखाता है कि हमें प्रवृत्ति मार्ग से निवृत्ति मार्ग की ओर किस माध्यम से अग्रसर होना है। उन्होंने कहा कि शनि दंडाधिकारी हैं, वे कर्मों के अनुसार न्याय करते हैं। जो दृढ़ कर्म है वह उपाय से नहीं टलते हैं उन्हें भोगना ही पड़ता है। वह किसी कंबल या काले तिल के दान से नहीं बदलते हैं। उन्होंने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि प्रार्थना ही सर्वोपरी है। उसका तरीका भिन्न भिन्न हो सकती है वह भाव एक ही होता है। ज्योतिषी को यह भ्रम ग्रह नहीं पालना चाहिए कि निर्धारित कर्मों के फल को बदल अथवा टाल सकता है। ज्योतिष दैवीय विद्या को जानने और पहचानने का शास्त्र है, और उसको मानने का शास्त्र है।
इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंसेस (आईकास) के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री रमेश चिंतक ने कहा कि आज आम जनमानस को भ्रामक जानकारियों से भ्रमित नहीं होना चाहिए। सोशल मीडिया में हर तरह का कंटेंट है। यह एक समुद्र की तरह है और समुद्र में विष भी है, और अमृत भी है। चुनना हम लोगों को है। फास्टफूड की तरह परोसे जा रहे उपाय हमें हानि पहुंचा सकते हैं। श्री चिंतक ने सभी ज्योतिषियों एवं विद्यार्थियों से कहा कि ज्योतिष का ज्ञान विधिवत तरीके से लेना चाहिए। हर आईकास से निकले ज्योतिष अनुरागियों का दायित्व है कि आम जनमानस को सही जानकारी एवं ज्योतिषीय मार्गदर्शन मिल सके।
कार्यक्रम में ज्योतिष प्रवीण, ज्योतिष विशारद एवं वास्तु के उत्तीर्ण विद्यार्थियों का दीक्षांत एवं उपाधि वितरण किया गया। आईकास के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नवनीत कौशिक जी ने उत्तीर्ण विद्यार्थियों को त्रिवाचा संकल्प दिलाया। सभी उत्तीर्ण विद्यार्थियों ने ज्योतिष का सदुपयोग करने की शपथ ली।
आईकास की ओर से विशिष्ठ उपाधि प्रदान की गई। जिसमें शशिशेखर त्रिपाठी को ज्योतिष वाचास्पति, नीरज जोशी ज्योतिष कलामणि, सिया शरण मिश्र को ज्योतिष कलामणि अजय शर्मा कोविद, शशि वैजल को कोविद, सुमन लता रस्तोगी को कोविद उपाधि प्रदान किया।
इस मौके पर ज्योतिषीय प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया।उपाधि अलंकरण समारोह का संचालन राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री अरुण त्रिपाठी ने किया। इसके अतिरिक्त कानपुर चैप्टर के चेयरमैन नीरज जोशी, कमलेश गुप्ता, चैप्टर के सचिव शशिशेखर त्रिपाठी, अजय शर्मा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में लखनऊ चैप्टर के चेयरमैन एस.के. मिश्र, हल्द्वानी से जगतप्रकाश त्रिपाठी, सिया शरण मिश्र, शशि वैंजल, सुमन लता रस्तोगी, पवन गुप्ता, आशीष शुक्ला, वेदाशीष शुक्ला एवं आशीष पाण्डेय आदि लोग उपस्थित रहे।
