केरल में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। एक ओर वामपंथी दलों के नेतृत्व वाला एलडीएफ गठबंधन है, जबकि दूसरी तरफ कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ मैदान में है। इसी बीच नेताओं के बयानों की वजह से INDIA गठबंधन के अंदर भी तनाव की स्थिति देखने को मिल रही है। ताजा घटनाक्रम में वामपंथी नेताओं ने सीधे राहुल गांधी के बयान पर आपत्ति जताई है।
वामपंथी दलों का कहना है कि केरल में राहुल गांधी जिस तरह से लेफ्ट पार्टियों की आलोचना कर रहे हैं, उससे INDIA गठबंधन की एकजुटता पर असर पड़ सकता है। उनका मानना है कि सहयोगी दलों पर सार्वजनिक तौर पर इस तरह के आरोप लगाने से गठबंधन के रिश्तों में कड़वाहट पैदा होती है।
सोमवार (9 मार्च) को दिल्ली में INDIA ब्लॉक की एक बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें मुख्य रूप से संसद सत्र की रणनीति पर चर्चा होनी थी। बैठक के दौरान वामपंथी सांसद जॉन ब्रिट्स और पी. संतोष कुमार ने इस मुद्दे को उठाते हुए राहुल गांधी के हालिया बयान पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी यह कैसे कह सकते हैं कि केरल में कम्युनिस्ट पार्टियों और बीजेपी के बीच किसी तरह का तालमेल है।
दरअसल राहुल गांधी ने हाल ही में आरोप लगाया था कि केरल की राजनीति में बीजेपी और कम्युनिस्ट दलों के बीच अप्रत्यक्ष समझ बनी हुई है। उन्होंने तंज कसते हुए ‘कम्युनिस्ट जनता पार्टी’ जैसा शब्द भी इस्तेमाल किया था। इसी टिप्पणी को लेकर वामपंथी नेता नाराज हैं और उन्होंने बैठक में इसे अनुचित बताया।
बैठक के दौरान कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के बयान के अर्थ को लेकर बाद में विस्तार से चर्चा की जा सकती है। उनका कहना था कि बैठक का मकसद संसद सत्र से जुड़े मुद्दों पर रणनीति बनाना है, इसलिए किसी एक बयान को लेकर पूरी बैठक को भटकाना ठीक नहीं है।
बताया जाता है कि बैठक में राहुल गांधी भी मौजूद थे। उन्होंने इस विषय पर बाद में विस्तार से बात करने की बात कही। वहीं कई अन्य नेताओं ने सुझाव दिया कि फिलहाल संसद से जुड़े एजेंडे पर ध्यान देना अधिक जरूरी है।
गौरतलब है कि केरल में अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। पिछले दो कार्यकाल से राज्य में वामपंथी दलों के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में है। वहीं बीजेपी राज्य में तीसरे स्थान की पार्टी मानी जाती है, जबकि कांग्रेस मुख्य विपक्ष के रूप में चुनावी मुकाबले में रहती है। कांग्रेस को उम्मीद है कि इस बार वह राज्य में सत्ता हासिल करने में सफल हो सकती है।








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