दशहरा उत्सव से पहले संसद भवन में देशभर की रामलीला समितियों के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य रामलीला की परंपरा के संरक्षण, प्रचार-प्रसार और भविष्य की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करना था।
बैठक को संबोधित करते हुए Om Birla ने कहा कि रामलीला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और नैतिक मूल्यों की जीवंत धरोहर है। उन्होंने कहा कि बदलते समय में इस सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना और उसका संरक्षण करना सभी की साझा जिम्मेदारी है।
बैठक में विभिन्न राज्यों और दिल्ली की रामलीला समितियों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। प्रतिनिधिमंडल की ओर से आयोजनों से जुड़ी कई व्यावहारिक मांगें रखी गईं। इनमें दिल्ली में रामलीला आयोजन के लिए Delhi Development Authority के मैदान निःशुल्क उपलब्ध कराने और आयोजनों के लिए मुफ्त बिजली जैसी सुविधाएं देने की मांग प्रमुख रही।
कार्यक्रम के दौरान रामलीला महासंघ के पदाधिकारियों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का सम्मान करते हुए उन्हें गदा और रामायण की प्रति भेंट की। इसके बाद प्रतिनिधियों को संसद भवन का भ्रमण भी कराया गया और उन्हें लोकसभा तथा राज्यसभा की कार्यप्रणाली से अवगत कराया गया।
अपने संबोधन में ओम बिरला ने कहा कि सदियों पुरानी रामलीला की परंपरा ने भारतीय समाज को मर्यादा, कर्तव्य, त्याग, सेवा और राष्ट्रभक्ति जैसे मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि देशभर की रामलीला समितियां भारतीय संस्कृति और लोक परंपराओं की सशक्त वाहक हैं, जिन्होंने पीढ़ियों तक भगवान श्रीराम के आदर्शों को समाज तक पहुंचाया है।
उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक तकनीक, नवाचार और जनभागीदारी के माध्यम से युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की आवश्यकता है। उनके अनुसार, रामलीला सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम है।
बैठक में मौजूद Praveen Khandelwal ने भी रामलीला को भारत की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि संसद भवन में रामलीला समितियों के साथ संवाद आयोजित करना भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति सकारात्मक पहल है।
बैठक के दौरान विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव और सुझाव साझा किए। रामलीला के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रचार-प्रसार को लेकर विस्तृत चर्चा हुई तथा भविष्य में इस परंपरा को और मजबूत बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया गया।







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