Thursday, July 09, 2026

उत्तर प्रदेश

गोरखपुर में भोजपुरी संस्कृति का रंगारंग आयोजन, सम्मान समारोह और लोकगीतों से सजी सांस्कृतिक संध्या

गोरखपुर में भोजपुरी संस्कृति का रंगारंग आयोजन, सम्मान समारोह और लोकगीतों से सजी सांस्कृतिक संध्या

गोरखपुर में बुधवार शाम भोजपुरी एसोसिएशन ऑफ इंडिया “भाई” की ओर से एक भव्य सांस्कृतिक संध्या एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश-विदेश से जुड़े अतिथियों, जनप्रतिनिधियों, साहित्यकारों और कलाकारों ने भाग लिया। समारोह की शुरुआत शाम करीब आठ बजे हुई, जहां अमेरिका से आए संस्था के संस्थापक अविनाश त्रिपाठी और डॉ. पल्लवी त्रिपाठी का गर्मजोशी से स्वागत किया गया।

इस अवसर पर भोजपुरी भाषा, लोक संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण में योगदान देने वाले प्रमुख व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया। विधान परिषद सदस्य डॉ. धर्मेन्द्र सिंह तथा भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष रमेश सिंह को सम्मान-पत्र और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान संस्था के पदाधिकारियों एवं वरिष्ठ सदस्यों द्वारा प्रदान किया गया।

अपने संबोधन में डॉ. धर्मेन्द्र सिंह ने कहा कि भोजपुरी भाषा और लोक परंपराओं को सहेजने के लिए ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का कार्य इस तरह के कार्यक्रम प्रभावी ढंग से करते हैं। वहीं रमेश सिंह ने कहा कि भोजपुरी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना चाहिए।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण सांस्कृतिक प्रस्तुतियां रहीं। लोक कलाकारों ने पारंपरिक कजरी, लोकगीत और संगीत की शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। प्रसिद्ध लोक गायक डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने अपनी लोकप्रिय कजरी प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं। कवयित्री नंदिनी श्रीवास्तव और रामायण धर द्विवेदी ने अपनी रचनाओं के माध्यम से कार्यक्रम में साहित्यिक रंग भी घोला।

संगीतकारों की टीम ने विभिन्न वाद्य यंत्रों पर आकर्षक प्रस्तुति देकर पूरे माहौल को संगीतमय बना दिया। कार्यक्रम का सफल संचालन रीता श्रीवास्तव ने किया, जबकि देर रात तक दर्शक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लेते रहे।

समारोह में शहर की कई प्रमुख हस्तियां भी मौजूद रहीं। इनमें जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद, साहित्यकार और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य लोग शामिल हुए। सभी ने भोजपुरी भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए इस तरह के आयोजनों को आवश्यक बताते हुए संस्था के प्रयासों की सराहना की।

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