लोकसभा ने बुधवार को एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और नारेबाजी देखने को मिली, जिसके चलते सदन की कार्यवाही दो बार कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।
विधेयक पारित होने के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि उन्हें सदन में अपनी बात पूरी तरह रखने का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि अपने भाषण के दौरान उन्होंने दिल्ली में छात्रों से जुड़े घटनाक्रम का मुद्दा उठाया और इसके लिए गृह मंत्री अमित शाह का नाम लिया, लेकिन सत्ता पक्ष के सांसदों के लगातार विरोध और टोका-टोकी के कारण वह अपनी बात पूरी नहीं रख सके।
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में कहा कि यदि संसद में उनकी आवाज़ रोकी भी गई, तब भी छात्रों के मुद्दों को उठाना जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बात को सदन में बीच में रोक दिया गया, लेकिन छात्रों की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता।
इससे पहले सदन में राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह से यह स्पष्ट करने की मांग की कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ कथित कार्रवाई को लेकर सरकार का क्या रुख था। इस टिप्पणी पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने कड़ा विरोध जताया और राहुल गांधी से माफी की मांग की, जिसके बाद सदन में जोरदार हंगामा शुरू हो गया।
दोपहर बाद जब लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो कांग्रेस सांसदों ने नेता प्रतिपक्ष को बोलने का मौका देने की मांग करते हुए नारेबाजी की। हंगामे के बीच प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विधेयक पर चर्चा का जवाब दिया। उनके वक्तव्य के बाद सदन ने ध्वनिमत से एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी और बाद में कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।
जवाब देते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में केंद्र सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंप दी थी। उन्होंने विपक्ष द्वारा परीक्षा लीक के मामलों को लेकर दिए गए कुछ आंकड़ों पर भी सवाल उठाए और कहा कि नए कानून के लागू होने के बाद कई मामलों में एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जा चुकी है।
सरकार का कहना है कि नई शिक्षा नीति और परीक्षा प्रणाली में सुधार से भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी, जबकि विपक्ष का आरोप है कि युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सरकार जवाबदेही से बच रही है। इसी को लेकर सदन के भीतर दोनों पक्षों के बीच तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली।








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