Bangladesh इस वक्त अपने राजनीतिक इतिहास के अहम दौर से गुजर रहा है। आम चुनाव में Tarique Rahman की बड़ी जीत के बाद सत्ता परिवर्तन तय माना जा रहा है। इसके साथ ही केयरटेकर सरकार का नेतृत्व कर रहे नोबेल शांति पुरस्कार विजेता Muhammad Yunus को पद छोड़ना होगा। अब देश में नई सरकार के गठन और भविष्य की दिशा को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
यूनुस का कार्यकाल और चुनौतियां
डॉ. यूनुस माइक्रोक्रेडिट मॉडल और Grameen Bank के संस्थापक के रूप में वैश्विक पहचान रखते हैं। 1974 के भीषण अकाल के बाद उन्होंने छोटे कर्ज के जरिए गरीबों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की पहल की थी।
केयरटेकर सरकार के प्रमुख के रूप में उनका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और प्रशासनिक ढांचे को सुधारना था। अगस्त 2024 में प्रदर्शनों के बीच वे निर्वासन से लौटे और दावा किया कि उन्हें एक “टूटी हुई व्यवस्था” विरासत में मिली है। उनका जोर था कि देश दोबारा तानाशाही की ओर न जाए।
सुधार चार्टर और जनमत की अपील
यूनुस सरकार ने सिर्फ चुनाव कराने के बजाय व्यापक संस्थागत सुधार पर भी जोर दिया। इसके लिए एक “सुधार चार्टर” तैयार किया गया। 19 जनवरी को राष्ट्र को संबोधित करते हुए उन्होंने जनमत संग्रह के जरिए नए ढांचे को समर्थन देने की अपील की थी, ताकि “नए बांग्लादेश” की नींव रखी जा सके।
राजनीतिक टकराव और आरोप-प्रत्यारोप
इस चुनाव में Bangladesh Nationalist Party (BNP) ने बढ़त हासिल की, जबकि Awami League को चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखा गया।
अवामी लीग की नेता Sheikh Hasina फिलहाल भारत में निर्वासन में हैं और उन पर गंभीर आरोप लगे हैं। अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने अगस्त 2024 के प्रदर्शनों के दौरान कथित रूप से घातक बल के इस्तेमाल के मामले में उन्हें सजा सुनाई है, जिससे राजनीतिक माहौल और तनावपूर्ण हो गया।
दूसरी ओर, तारिक रहमान दो दशक बाद लंदन से लौटकर प्रधानमंत्री पद के प्रमुख दावेदार के रूप में उभरे। उनका मुकाबला Jamaat-e-Islami से भी रहा, लेकिन चुनाव में BNP को स्पष्ट बढ़त मिली।
आगे क्या?
तारिक रहमान की जीत के बाद अब नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। माना जा रहा है कि नई सरकार आर्थिक स्थिरता, संस्थागत सुधार और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्राथमिकता दे सकती है।
हालांकि, देश में सांप्रदायिक तनाव और राजनीतिक ध्रुवीकरण अभी भी चुनौती बने हुए हैं। अवामी लीग ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं और इसे अवैध बताया है।
ऐसे में बांग्लादेश के सामने सबसे बड़ी चुनौती राजनीतिक स्थिरता कायम करना और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास बहाल करना होगी। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि नया नेतृत्व देश को किस दिशा में ले जाता है।









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