ओडिशा में हुई एक नई खोज ने इस क्षेत्र के प्राचीन इतिहास को लेकर वैज्ञानिकों की रुचि बढ़ा दी है। मयूरभंज जिले के बारीपदा क्षेत्र के पास एक शैक्षणिक फील्ड सर्वे के दौरान शोधकर्ताओं और छात्रों की टीम को ऐसे फॉसिल मिले हैं, जिनकी उम्र शुरुआती अनुमान के अनुसार लगभग 1.5 करोड़ वर्ष बताई जा रही है। इन अवशेषों में शार्क के दांत, रीढ़ की हड्डियों के हिस्से और कुछ अन्य जीवों के फॉसिल शामिल हैं।
यह खोज तब सामने आई जब फील्ड स्टडी के दौरान टीम की नजर जमीन में मौजूद कुछ असामान्य संरचनाओं पर पड़ी। शुरुआती जांच के बाद वैज्ञानिकों ने स्थानीय लोगों से जानकारी जुटाई। इलाके में इन्हें लंबे समय से अलग तरह के प्राचीन अवशेष माना जाता था। इसके बाद विस्तृत अध्ययन शुरू किया गया।
जांच में मिले अवशेषों ने वैज्ञानिकों को यह संकेत दिया कि यह इलाका कभी समुद्री वातावरण का हिस्सा रहा हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी स्थान पर शार्क जैसे समुद्री जीवों के फॉसिल मिलते हैं, तो यह इस बात का मजबूत संकेत होता है कि लाखों वर्ष पहले वहां समुद्र मौजूद रहा होगा।
वैज्ञानिकों का मानना है कि ये फॉसिल मायोसीन युग के हो सकते हैं, जो लगभग 2.3 करोड़ से 53 लाख वर्ष पहले का समय माना जाता है। शुरुआती अध्ययन के आधार पर इनकी उम्र लगभग 15 मिलियन वर्ष आंकी जा रही है।
इस खोज की सबसे बड़ी अहमियत यह है कि यह पूर्वी भारत के भूगर्भीय इतिहास को समझने में मदद कर सकती है। माना जा रहा है कि समय के साथ समुद्र के स्तर में बदलाव, मिट्टी का जमाव और भूगर्भीय गतिविधियों के कारण समुद्री क्षेत्र धीरे-धीरे पीछे हट गया और वर्तमान भू-आकृति बनी।
अब शोधकर्ता बाकी फॉसिल की पहचान और विस्तृत अध्ययन कर रहे हैं ताकि यह समझा जा सके कि उस समय इस क्षेत्र का इकोसिस्टम कैसा था और यहां किस प्रकार के जीव रहते थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यह क्षेत्र वैज्ञानिक अध्ययन, शिक्षा और पर्यटन के लिए भी महत्वपूर्ण बन सकता है।








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