Monday, August 10, 2026

राष्ट्रीय

संसद के आखिरी 4 दिनों में गरमाएगा माहौल, महिला आरक्षण-परिसीमन सहित 3 अहम बिलों पर घमासान

संसद के आखिरी 4 दिनों में गरमाएगा माहौल, महिला आरक्षण-परिसीमन सहित 3 अहम बिलों पर घमासान

 

संसद के मानसून सत्र के समाप्त होने में अब महज चार दिन बाकी हैं। सदन में लगातार जारी गतिरोध के बीच सरकार के सामने कई अहम विधेयकों को आगे बढ़ाने की चुनौती है। महिला आरक्षण, लोकसभा सीटों के परिसीमन और विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम यानी FCRA में संशोधन से जुड़े प्रस्तावों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ने के आसार हैं।

खास बात यह है कि सोमवार, 10 अगस्त की लोकसभा की कार्यसूची में इन तीनों में से कोई भी विधेयक शामिल नहीं था। ऐसे में अब सवाल यह है कि सत्र के बचे हुए दिनों में सरकार इन महत्वपूर्ण कानूनों को सदन में कैसे आगे बढ़ाती है।

महिला आरक्षण और परिसीमन पर विपक्ष से साधा जा रहा संपर्क

सरकार की तरफ से विपक्षी दलों के साथ बातचीत का सिलसिला जारी है। माना जा रहा है कि कुछ विपक्षी दल महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित प्रस्तावों पर पहले की तुलना में नरम रुख अपना सकते हैं। हालांकि कांग्रेस और उसके कई सहयोगी दल इन विधेयकों के साथ FCRA संशोधन का भी विरोध कर रहे हैं।

प्रस्तावित संविधान संशोधन के तहत वर्ष 2029 से लोकसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने और परिसीमन के जरिए लोकसभा क्षेत्रों की सीमाओं को नए सिरे से तय करने का प्रस्ताव बताया जा रहा है।

इससे पहले अप्रैल में संबंधित संविधान संशोधन को सदन में जरूरी दो-तिहाई समर्थन नहीं मिल पाया था और विधेयक पारित नहीं हो सका था।

FCRA बिल पर कांग्रेस का कड़ा विरोध

FCRA संशोधन विधेयक 2026 को लेकर भी सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी चल रही है। यह विधेयक 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था, लेकिन अभी इस पर विस्तृत चर्चा और पारित होने की प्रक्रिया बाकी है।

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर केंद्र को लगता है कि संसद के बचे हुए कुछ दिनों में इस विधेयक को पारित कराया जा सकता है, तो उसे इस उम्मीद को छोड़ देना चाहिए।

कांग्रेस का आरोप है कि प्रस्तावित संशोधन का असर अल्पसंख्यक समुदायों और गैर-सरकारी संगठनों पर पड़ सकता है। पार्टी ने विधेयक को जनविरोधी और असंवैधानिक बताते हुए इसके विरोध का ऐलान किया है।

वेणुगोपाल ने यह भी कहा है कि अगर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह विधेयक को आगे बढ़ाने के लिए सदन में आते हैं तो विपक्ष की तरफ से इसका कड़ा विरोध किया जाएगा।

राहुल गांधी से कई बार संपर्क कर चुके हैं रिजिजू

महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पर विपक्ष का समर्थन जुटाने के लिए सरकार की तरफ से बातचीत तेज की गई है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की है। दोनों नेताओं के बीच इस विषय पर फोन पर भी बातचीत हुई है।

सूत्रों के अनुसार, रिजिजू ने दोनों प्रस्तावित विधेयकों को आगे बढ़ाने में कांग्रेस का समर्थन मांगा था। इसके जवाब में राहुल गांधी ने इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग रखी।

दोनों पक्षों के बीच इन मुद्दों को लेकर सोशल मीडिया पर भी राजनीतिक बहस देखने को मिली है।

सपा और डीएमके समेत अन्य दलों से भी संपर्क

सरकार सिर्फ कांग्रेस तक सीमित नहीं है। सत्ता पक्ष की ओर से समाजवादी पार्टी, डीएमके समेत कई अन्य विपक्षी दलों के नेताओं से भी इन विधेयकों को लेकर उनका रुख जानने की कोशिश की जा रही है।

डीएमके की स्थिति इस मामले में खास मानी जा रही है। पार्टी के लोकसभा में 22 सांसद हैं और वह सदन में बड़ी विपक्षी ताकतों में शामिल है। राज्यसभा में उसके 8 सदस्य हैं।

हालांकि, डीएमके अब INDIA ब्लॉक का हिस्सा नहीं है। ऐसे में सरकार के लिए उसका समर्थन या रुख महत्वपूर्ण हो सकता है।

अकाली दल ने महिला आरक्षण और परिसीमन का किया समर्थन

शिरोमणि अकाली दल ने शनिवार को महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को अपना समर्थन देने की घोषणा की। पंजाब में पार्टी का फिलहाल एक लोकसभा सांसद है।

पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात भी की है। इसके बाद इन दोनों मुद्दों पर अकाली दल के रुख को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

तमिलनाडु में परिसीमन के खिलाफ प्रस्ताव

परिसीमन को लेकर दक्षिण भारत के राज्यों में चिंता अलग स्तर पर सामने आ रही है। शनिवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की ओर से बुलाई गई बैठक में कुछ सांसदों की मौजूदगी के बीच परिसीमन के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया।

इसमें लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या को बरकरार रखने की मांग की गई। बैठक का डीएमके और एआईएडीएमके ने विरोध किया।

वहीं, एनसीपी (एसपी) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने परिसीमन विधेयक को लेकर अभी कोई स्पष्ट रुख नहीं बताया है। उनका कहना है कि जब विधेयक सदन में आएगा, तब वह अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ इस पर चर्चा करेंगी।

कांग्रेस ने सांसदों को जारी किया व्हिप

इस बीच कांग्रेस ने अपने सांसदों की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए व्हिप जारी कर दिया है। पार्टी ने लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसदों से सदन में उपस्थित रहने को कहा है।

इससे पहले अप्रैल में संविधान संशोधन से जुड़े विधेयक को पारित कराने के लिए 16 से 18 अप्रैल के बीच विशेष सत्र बुलाया गया था। हालांकि, उस दौरान सरकार जरूरी समर्थन जुटाने में सफल नहीं हो सकी और विधेयक पारित नहीं हो पाया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में किसी महत्वपूर्ण विधेयक के इस तरह गिरने की घटना को उस समय काफी अहम माना गया था।

अब मानसून सत्र के सिर्फ चार दिन शेष हैं। ऐसे में महिला आरक्षण, परिसीमन और FCRA संशोधन जैसे मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत के साथ-साथ टकराव भी बढ़ सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार इनमें से किन विधेयकों को सदन में लाने और पारित कराने में सफल होती है।

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