रामपुर: जिला अस्पताल की इमरजेंसी में बिजली गुल होने के दौरान मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशनी में घायल किशोर के पैर में टांके लगाए जाने के मामले ने स्वास्थ्य विभाग में हलचल बढ़ा दी है। घटना सामने आने के बाद शासन ने मामले का संज्ञान लिया है और अब इसकी औपचारिक जांच शुरू कर दी गई है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. दीपा सिंह ने मंगलवार शाम दो सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। टीम को पूरे घटनाक्रम की जांच कर तीन दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
बिजली जाने के बाद मोबाइल टॉर्च से हुआ इलाज
मामला रविवार रात करीब 9:30 बजे का बताया जा रहा है। जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में एक घायल किशोर इलाज के लिए पहुंचा था। इसी दौरान अस्पताल की बिजली चली गई।
आरोप है कि बिजली गुल होने के बाद इमरजेंसी में पर्याप्त वैकल्पिक रोशनी की व्यवस्था नहीं हो सकी। जनरेटर या इन्वर्टर की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण अस्पताल स्टाफ को मोबाइल फोन की टॉर्च का इस्तेमाल करना पड़ा।
इसी रोशनी में घायल किशोर के पैर में टांके लगाए गए। घटना की तस्वीर और जानकारी सामने आने के बाद अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे।
खबर सामने आने के बाद शासन ने लिया संज्ञान
मामले को लेकर खबर सामने आने के बाद शासन स्तर पर भी इसका संज्ञान लिया गया। इसके बाद सीएमओ डॉ. दीपा सिंह ने मंगलवार शाम करीब 7:30 बजे दो सदस्यीय जांच टीम गठित की।
जांच समिति को घटनाक्रम से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल करने के बाद तीन दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सीएमओ को सौंपनी है।
जांच में इन सवालों के मिलेंगे जवाब
जांच टीम मुख्य रूप से यह पता लगाएगी कि रविवार रात बिजली जाने के बाद इमरजेंसी वार्ड में वैकल्पिक बिजली व्यवस्था क्यों उपलब्ध नहीं कराई जा सकी।
इसके अलावा टीम जनरेटर और इन्वर्टर की व्यवस्था से जुड़े पहलुओं की भी जांच करेगी। यह भी पता लगाया जाएगा कि अगर अस्पताल में वैकल्पिक व्यवस्था मौजूद थी तो उसका इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया।
जांच का एक अहम बिंदु यह भी होगा कि घायल किशोर के इलाज के दौरान मोबाइल फोन की टॉर्च का सहारा लेने की स्थिति आखिर क्यों बनी।
लापरवाही मिली तो होगी कार्रवाई
सीएमओ डॉ. दीपा सिंह के मुताबिक, जांच रिपोर्ट आने के बाद सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अगर जांच में किसी कर्मचारी या जिम्मेदार अधिकारी की लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
अस्पताल की इमरजेंसी व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने जिला अस्पताल की इमरजेंसी में बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल की इमरजेंसी में बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में मरीजों के इलाज के लिए पर्याप्त बैकअप व्यवस्था होना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
अब जांच समिति की रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि बिजली व्यवस्था में कमी किस स्तर पर हुई और इस पूरे मामले में आखिर किसकी जिम्मेदारी तय होती है।








Visit Today : 139
Total Visit : 278359
Hits Today : 340
Total Hits : 702471
Who's Online : 5